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रीयल एस्टेट में सुधार को लामबंदी

निकट भविष्य में अगर सरकार ने रीयल एस्टेट की डांवाडोल हालत को और सुधारने की दिशा में कदम उठाया तो इसका फायदा आपको मिलना तय है क्योंकि फ्लैटों की मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में और कमी के लिए उद्योगजगत लामबंदी में जुट गया है। रीयल एस्टेट क्षेत्र के संगठनों के बाद अब उद्योग चैंबर फिक्की ने भी इस मामले में आगे आते हुये सरकार के समक्ष आठ सूत्रीय एजेंडा रखा है। चैंबर के मुताबिक इसके लिए सरकार को जहां एक ओर घरलू मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कमी करनी चाहिये, वहीं दूसरी ओर रीयल एस्टेट कंपनियों की परियोजनाओं के संचालन को लेकर विदेशी पूंजी हासिल करने के नियम को उदार करना होगा। मतलब यह कि रीयल एस्टेट क्षेत्र के बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) में छूट देना जरूरी है। चैंबर ने एक सव्रेक्षण के हवाले से कहा है कि पूंजी बाजार में रीयल एस्टेट कंपनियों का बुरा हाल है । जहां एक ओर निवेशकों की शेयर बिकवाली के चलते उनका मार्केट कैपिटलाक्षेशन 80 फीसदी से ज्यादा गिर गया है, वहीं दूसरी तिमाही के दौरान इन कंपनियों की हालत और खराब हो गई है। लिहाजा, इस उद्योग की हालत को सुधारने के लिए सरकार को तुरंत ठोस उपाय करने जरूरी हैं। वैसे बाजार में मंदी के चलते आगामी कुछ महीनों के दौरान रीयल एस्टेट के मूल्यों में 10 से 15 फीसदी की कमी हो सकती है।ड्ढr चैंबर के मुताबिक रीयल एस्टेट कंपनियों को लंबे समय के लिए अपेक्षाकृत पर्याप्त और सस्ते र्का की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिये। कानूनी प्रावधानों को लचीला बनाने के साथ ही सिंगल विंडो क्िलयरंस पर ध्यान देना जरूरी है। भूमि कानून सुधार के अलावा ढांचागत विकास पर जोर देते हुये हाउसिंग परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिये जाने चाहिये। सरकार को शुरुआती स्तर पर जमीनों के मूल्यों की सट्टेबाजी पर अंकुश लगाते हुये इसकी बिक्री सट्टेबाजों को न कर सिर्फ परियोजना संचालकों को ही की जाए। आम ग्राहकों के विश्वास को बढ़ाने के लिए र्का अदायगी में डिफाल्ट करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कानून लागू किये जाएं। उधर, आर्थिक मंदी से उबरने के लिए सरकार की तरफ से दूसरा प्रोत्साहन पैकेज आने की चर्चाओं के बीच उद्योग जगत ने कहा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गतिविधियां बढ़ाने के लिए सरकार को एक लाख करोड़ रुपए का अलग कोष बनाना चाहिए। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि दूसरा पैकेज केवल ब्याज दरों में नरमी लाने पर ही केन्द्रित न होकर निवेशकों और खरीदारों में विश्वास बढ़ाने वाला भी होना चाहिए। सरकार की मध्यवर्षीय आर्थिक समीक्षा का जिक्र करते हुए एसोचैम ने कहा है कि एक लाख करोड़ रुपए का विशेष कोष बनने से निजी क्षेत्र में इस्पात, ऑटोमोबाइल, परिवहन, उर्वरक, तेल एवं गैस खोज तथा रिफाइनरी परियोजनाओं को धन उपलब्ध कराकर तेजी लाने में मदद मिलेगी।

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