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दुश्मन की मिसाइल मार गिराएंगे उसी के देश में

दुश्मन की मिसाइल मार गिराएंगे उसी के देश में

भारत ने एक ऐसी वायु रक्षा प्रणाली पर काम शुरू कर दिया है जिसके तहत सेना पांच हजार किलोमीटर की दूरी पर भी दुश्मन की मिसाइल को उसके भारतीय वायु क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिरा सकेगी।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) बैलास्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (बीएमडी) के तहत पहले ही एक ऐसी मिसाइल विकसित कर चुका है जो दो हजार किलोमीटर की दूरी पर हवाई खतरे को खत्म कर सकती है। डीआरडीओ अब अगले चरण पर काम कर रहा है।

डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ने बताया कि दूसरे चरण के तहत मिसाइलें इस तरह से विकसित की जा रही हैं, जो पांच हजार किलोमीटर की दूरी पर भी दुश्मन की मिसाइल को मार गिराने में सक्षम होंगी। उन्होंने कहा कि इन मिसाइलों को वर्ष 2016 तक तैयार कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।

सारस्वत ने कहा, यह तय कार्यक्रम के मुताबिक चल रहा है और हम शुरुआती डिजाइन और परीक्षण चरण की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा, हमारी मौजूदा मिसाइलें दो हजार किलोमीटर की दूरी पर निशाना साधने में सक्षम हैं। बाद में हम ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित कर लेंगे, जिनकी मारक क्षमता पांच हजार किलोमीटर की होगी।


पिछले वर्ष जुलाई में डीआरडीओ ने उड़ीसा के तट स्थित समेकित परीक्षण रेंज से स्वदेश निर्मित इंटरसेप्टर मिसाइल के पहले चरण का सफल परीक्षण किया था। बीएमडी प्रणाली विकसित करने के लिये अमेरिका या किसी अन्य देश के साथ गठजोड़ करने की संभावना पर सारस्वत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने की हमारी प्रक्रिया सिर्फ खुद की विकास प्रक्रिया को बल देने के लिए है। जब कभी हमें नई प्रौद्योगिकी की जरूरत महसूस होगी हम सहयोग ले सकते हैं।

ऐजीस मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत को देने की अमेरिका की पेशकश के बारे में उन्होंने कहा कि ये बाजार ताकतें हैं और हमेशा रहेंगी। बाजार ताकतें हमेशा उपलब्ध उपकरण बेचने की कोशिश करेंगी। भारत में यह महज अनुसंधान और विकास की कोशिश नहीं है, बल्कि यह वास्तविक कार्यक्रम है। लिहाजा, मुझे नहीं लगता कि हमें इस बारे में चिंतित होने की जरूरत है।

भारत बीएमडी प्रणाली के लिए लंबी दूरी की क्षमता वाले खोजी रडार भी विकसित कर रहा है। पहले चरण के तहत हुए प्रयोगों में इस्तेमाल किए गए रडार भारत और इजराइल की संयुक्त भागीदारी के साथ विकसित किए गए थे। दूसरे चरण में रडार के 80 फीसदी घटक स्वदेश निर्मित होंगे।

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