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सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता न्यायालयः सीआईसी

सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता न्यायालयः सीआईसी

केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने पूर्व के आदेशों को पलटते हुए व्यवस्था दी है कि सुप्रीम कोर्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता, चाहे आवेदक के पास सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत सूचना पाने के अन्य उपाय क्यों न हों।

पूर्व में कई मामलों में तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने कहा था कि यदि किसी संगठन में सूचना मुहैया कराने के लिए कोई कानून और नियम है तो सूचना मांगने वाले को उनका उपयोग करना चाहिए, न कि सूचना का अधिकार अधिनियम का।

उन्होंने, सुप्रीम कोर्ट के तर्क स्वीकार करते हुए कहा था कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, वर्तमान कानूनों पर पारदर्शी कानून तब ही प्रभावी होगा जब दोनों के बीच असंगति हो।

न्यायालय ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया और दस्तावेजों के बारे में सूचना मुहैया कराने के लिए पहले ही व्यवस्था है तो ऐसे में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सकते क्योंकि दोनों के बीच असंगति नहीं है।

अब, इन दलीलों को खारिज करते हुए सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने कहा है यह आयोग तत्कालीन सूचना आयुक्त के फैसले से सम्मानपूर्वक असहमति जताता है कि सुप्रीम कोर्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना देने से इनकार कर सकता है और आवेदक को सुप्रीम कोर्ट नियमों के तहत सूचना के लिए आवेदन करना होगा।

गांधी ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अस्तित्व में आने के पहले से ही, सूचना मुहैया कराने के कई उपाय हों तो भी नागरिक सूचना हासिल करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि उस व्यवस्था का चयन करना नागरिक का विशेषाधिकार है, जिसके तहत उसे सूचना चाहिए।

यह मामला आरटीआई आवेदक आरएस मिश्र से संबंधित है जिन्होंने नौ सवालों, न्यायिक फैसले के लिए कारण और कुछ पत्रों पर स्थिति रिपोर्ट के माध्यम से न्यायालय से जानकारी चाही थी, लेकिन उन्हें इनकार कर दिया गया था। न्यायालय ने उन्हें सलाह दी थी कि वह अपेक्षित दस्तावेजों के लिए उसके नियमों के अनुसार आवेदन करें।

गांधी ने कहा कि आयोग यह स्पष्ट करना चाहेगा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के नियमों को न्यायालय ने लागू किया है और उन्हें रद्द नहीं किया जा सकता, उसी तरह सूचना का अधिकार अधिनियम संसद ने पारित किया है और उसे निलंबित नहीं किया जा सकता।

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