DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

824 में से पांच सीट, सकते में भाजपा

824 में से पांच सीट, सकते में भाजपा

हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए भारी झटका साबित हुए। असम में सरकार बनाने की उसकी उम्मीदों पर न सिर्फ पानी फिर गया बल्कि वहां उसकी सीटें पहले से आधी रह गई।

केरल में खाता खोलने की उसकी पिछले तीन विधानसभा चुनाव से चली आ रही दिली ख्वाहिश इस बार भी पूरी नहीं हुई। पांचों राज्यों में 824 सीट के लिए हुए चुनाव में वह सिर्फ असम में पांच सीट जीत पाई।

पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी सहित भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेता असम में अपनी सरकार बनने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त थे। चुनाव नतीजे आने से कुछ दिन पहले उन्होंने बहुत ही विश्वास के साथ दावा किया था, हमें पूरा यकीन है कि असम में अगली सरकार हमारी बनेगी। यही नहीं, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल हमारे लिए कठिन रहने के बावजूद वहां हम इतनी सीट जीतेंगे कि उससे उन राज्यों में भाजपा के राजनीतिक विस्तार का आधार बन सकेगा।

इन दावों के बावजूद पांचों राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन यह रहा कि असम में उसकी सीट दस से घट कर पांच हो गई और केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी में खाता तक नहीं खुला। असम के पर्यवेक्षक और पार्टी महासचिव विजय गोयल ने राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को स्तब्धकारी बताते हुए कहा कि आशाओं का ऐसा उलटफेर संभवत: कांग्रेस द्वारा अंतिम दौर में यह पासा फेंके जाने से हुआ कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए वह उल्फा से वार्ता का सिलसिला शुरू करेगी।

इन परिणामों से राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन राजनीति का दूसरा ध्रुव बनने की भाजपा की महत्वकांक्षा को भी तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार अरुण जेटली ने तर्क दिया कि विपक्ष की एकता की कमी के अभाव में असम में विश्वसनीय विकल्प नहीं बन पाया। ऐसा नहीं कर पाने का हमें खेद है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि असम के परिणाम पार्टी के लिए बड़ा धक्का हैं। हमने असम गण परिषद से गठबंधन बनाने का ईमानदार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए।

भाजपा के पूर्वोत्तर मामलों के संगठन सचिव पी चन्द्रशेखर ने चुनावी नतीजों पर हैरानी जताते हुए कहा, मैं अभी भी नहीं समझ पा रहा हूं कि हमारे कुछ प्रमुख नेता तक कैसे हार गए। जितने भी उम्मीदवार बनाए गए वे सब जनता से संपर्क में थे। हमें इस बात का विश्लेषण करने की जरूरत है कि आखिर ऐसा कैसे हुआ।

विजय गोयल ने कहा कि भाजपा की हार का एक कारण शायद यह रहा कि कांग्रेस ने असम में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों का वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, बहरहाल, हम हारे जरूर हैं, लेकिन निराश नहीं हैं। हम पार्टी को राज्य में मजबूत बनाने में और जी जान से जुटेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:824 में से पांच सीट, सकते में भाजपा