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बुंदेलखंड में सूरज ने तरेरी आंख, पारा 47 के पार

बुंदेलखंड में अब गर्मी चरम पर पहुँच गई है। सूरज की तल्ख किरणें बदन में शूल की तरह चुभ रही हैं। भीषण गर्मी से जनजनीवन बेहाल हो गया है। जहाँ लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है वहीं भू-जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। गर्मी में संक्रामक बीमारियां भी तेजी से पांव पसार रही हैं। इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी गर्मी से बेहाल हैं।

मई का एक पखवारा बीतने के बाद गर्मी अपनी पूरी रंगत में आ गई है। सुबह सात बजे से ही कड़ी धूप लोगों को उलझन में डाल दे रही है। घर से बाहर निकलने के लिए लोगों को सोचना पड़ रहा है। सड़कों पर सिर्फ आफिस टाइम में ही भीड़ दिख रही है। बच्चों की स्कूल जाने में हिम्मत छूट जा रही है। तीखी गर्मी के साथ ही गर्म हवाएं और भी घातक साबित हो रही है।

दोपहर को तो सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक सड़कों पर अजब सी खामोशी देखने को मिलती है। जो लोग घर से निकल भी रहे हैं वह पूरा शरीर ढक कर निकल रहे हैं। मजबूरी में लोगों को दोपहर में घर से बाहर निकलना पड़ता है। वरना वह घरों में ही दुके रहते हैं। गर्मी के साथ ही संक्रामक बीमारियों ने भी पाँव पसारना शुरु कर दिया है। एक सप्ताह से पारा हर रोज चढ़ रहा है।

गर्मी के साथ उमष भी बढ़ रही है। रात के समय पेड़ों का पत्ता भी नहीं हिलता। ऐसे में लोग रात को छतों पर टहलकर बितातें हैं। गर्मी के आगे सारे संसाधन फेल हो गए हैं। न तो पंखा काम कर रहा है और न ही कुलर। साधन संपन्न लोगों ने अपने घरों में एसी तो लगवा लिया है लेकिन बिजली आपूर्ति न होने से लोग बिलबिला जा रहे हैं। और तो और बच्चे गर्मी से बेहाल हो जा रहे हैं। शनिवार को पारा 47 से पार बताया जा रहा था। आसमान से ही नहीं धरती से भी आग निकल रही है।

धरती इतनी गरम हो गई है कि नंगे पाँव नहीं चला जा सकता। छह साल से सूखा पड़ने के कारण धरती और भी लाल हो गई है। उसपर सूरज की तल्खी लोगों को बेहाल कर दे रही है।

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  • Web Title:बुंदेलखंड में सूरज ने तरेरी आंख, पारा 47 के पार