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हाईकोर्ट फैसले से 75 फीसदी सीएमओ की छिन जाएगी कुर्सी

वरिष्ठता के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारियों की तैनाती को लेकर उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका के बाद आए निर्णय से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश भर के जिलों में तैनात 75 प्रतिशत मुख्य चिकित्साधिकारियों की कुर्सी छिन जाएगी।

माह अगस्त 2009 में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा.लल्लन प्रसाद ने उच्च न्यायालय में सरकार के खिलाफ एक रिट दायर कर यह मांग रखी थी कि मुख्य चिकित्साधिकारियों के पदों पर तैनाती वरिष्ठता के आधार पर की जाए। लगभग दो वर्ष चली इस सुनवाई के बाद शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने फैसला सुना दिया। इस फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि सीएमओ के पदों पर तैनाती प्रदेश स्तरीय वरिष्ठता सूची के आधार पर की जाए और सेवाकाल तक चिकित्साधिकारियों को सीएमओ के पद से वंचित न रखा जाए।

ढाई पृष्ठ के आदेश से प्रदेश भर के मुख्य चिकित्साधिकारियों में खलबली मची हुई है। सरकार ने यदि वरिष्ठता सूची के आधार पर सीएमओ और सीएमएस के पद बांटने शुरु किए तो वर्तमान समय में तैनात 75 प्रतिशत सीएमओ की कुर्सी चली जाएगी। अभी तक मुख्य चिकित्साधिकारियों का पद पाने के लिए धन और सिफारिश की जरुरत होती थी। वर्तमान समय में अधिकांश मुख्य चिकित्साधिकारी या तो पैसे के बल पर कुर्सी पाए हैं अथवा मंत्री, विधायक, सांसद और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के रिश्तेदार हैं।

उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि बताएं कि सीएमओ पद के लिए कितने का टेंडर होता है। स्वास्थ्य विभाग की नियमावली के अनुसार लेबल-4 के चिकित्साधिकारियों को ही मुख्य चिकित्साधिकारी अथवा मुख्य चिकित्साधीक्षक का पद सौंपा जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में ऐसे कई अधिकारी सीएमओ की कुर्सी पर विराजमान हैं जो अभी तक लेबल-4 पर नहीं पहुंच सके हैं।

रिट दायर करने वाले डा.लल्लन प्रसाद वर्ष 2005 से लगातार लेवल-4 में चले आ रहे हैं। इससे पहले वह कई जनपदो में डिप्टी सीएमओ और अपरे मुख्य चिकित्साधिकारी के पदों पर भी रह चुके हैं। उच्च न्यायालय में मुकदमे के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने फजीहत से बचने के लिए डा.लल्लन प्रसाद को मुख्य चिकित्साधिकारी परिवार कल्याण के पद पर फरुखाबाद में तैनात कर दिया था। हालांकि डा.लल्लन प्रसाद की चरित्र पंजिका में उत्कृष्ट प्रविष्टि ही होती रही हैं।

बाद में लखनऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी परिवार कल्याण की हत्या के बाद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्र अंटू और परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा का इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद परिवार कल्याण विभाग ही समाप्त उसे चिकित्सा विभाग में ही समाहित कर दिया गया। इसके चलते जिलों में मुख्य चिकित्साधिकारी परिवार कल्याण का पद भी समाप्त कर दिया गया जिससे एक बार फिर डा.लल्लन प्रसाद अपर मुख्य चिकित्साधिकारी रह गए।

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