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दिल्ली की तस्वीर ही नहीं, तकदीर भी संवार रही डीएमआरसी

मेट्रो दिल्ली वालों के लिए शान की सवारी है। इस शानदार सवारी ने दिल्ली को रफ्तार ही नहीं दी है, बल्कि यह बेसहारा बच्चों का भविष्य संवारने में भी जुटी है। डीएमआरसी की ओर से चमचमाते तीस हजारी मेट्रो स्टेशन के सामने एक ऐसी जगह भी बनाई गई है, जहां डेढ़ सौ बेसहारा मासूमों को पनाह मिलती है।

नौनिहालों के लिए यहां पर रहने और खाने-पीने के साथ पढ़ाई की भी पुख्ता व्यवस्था की गई है। मेट्रो की कोशिश है कि यहां पल रहे गुदड़ी के लाल व्यावसायिक शिक्षा पाकर आत्मनिर्भर हो जाएं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की इस पहल में एक सामाजिक संगठन उसका साथी बना है।

तीस हजारी मेट्रो स्टेशन के ठीक सामने तीन हजार वर्ग गज में बनाए तिमंजिला चाइल्ड होम में डेढ़ सौ अनाथ बच्चों को आशियाना मिला हुआ है। यहां उनके रहने, खाने-पीने के साथ ही पढ़ाई की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन बच्चों को स्कूली के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा भी दिलाई जा रही है। इन अनाथ बच्चों को स्वेच्छा से दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से लेकर छात्र तक पढ़ाने के लिए आते हैं। इसके अलावा कई नौकरी पेशा लोग भी अपनी तरह से योगदान दे रहे हैं।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने 5 जनवरी 2010 को नवनिर्मित चाइल्ड होम के संचालन की जिम्मेदारी एक सामाजिक संगठन को सौंपी थी। इस चाइल्ड होम की देखरेख कर रहे सीनियर कॉर्डिनेटर ए के तिवारी के अनुसार बेसहारा बच्चों के पढ़ने के लिए आधुनिक क्लासरूम हैं, रहने व सोने के लिए व्यवस्थित बेडरूम हैं और खाने के लिए बड़ा सा डाइनिंग हॉल है। जहां एक साथ सौ बच्चों बैठकर भोजन करते हैं। इतना ही नहीं बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्राप्ति के लिए सरकारी व निजी स्कूलों में भर्ती कराया गया है। चाइल्ड होम की जिम्मेदारी मेट्रो व सामाजिक संगठन दोनों मिलकर संभाल रहे हैं।
(दिल्ली संस्करण)

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