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करें मुद्रास्फीति से पार पाने के लिए कुछ जतन

पहले मंदी ने लोगों को मारा, फिर महंगाई परेशान कर रही है। कुल मिला लोगों को कहीं से भी राहत नहीं मिल पा रही है। ऊपर से अब वेतन भी उस तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं जैसे पहले बढ़ रहे थे, ऐसे में मुद्रास्फीति नाम की बीमारी घातक होती जा रही है।

आमतौर पर मुद्रास्फीति को लोग बिजनेस की दुनिया का बड़ा ही कठिन शब्द समझते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। अगर इस बात को समझना है तो सीधे-सीधे एक साल का हिसाब समझों। अगर आज कोई चीज सौ रुपए की आ रही है और मुद्रास्फीति की दर 15 प्रतिशत है तो माना जाता है कि वह चीज अगले साल 115 रुपए की हो जाएगी। 

हालांकि ऐसा कहना आंकड़ों की बाजीगरी होती है, क्योंकि कोई चीज 150 रुपए की हो सकती है, तो कोई चीज 100 रुपए की ही बनी रह सकती है। फिर भी अगर मान लिया जाए कि चीज 115 रुपए की हो गई तो आपकी कमाई भी बढ़कर इतनी होना चाहिए। तब माना जाएगा कि जितनी महंगाई बढ़ी उतना आपकी आमदनी। लेकिन अगर कमाई मात्र सात या आठ प्रतिशत ही बढ़ी और महंगाई 15 प्रतिशत तक तब तो नुकसान ही नुकसान ही है।

ऊपर से इस दिक्कत को सरकार महंगाई रोकने के नाम पर और बढ़ा रही है। कर्ज को महंगा किया जा रहा है, लेकिन बाजार में सामान की आपूर्ति नहीं बढ़ाई जा रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान उनको हो रहा है जिन लोगों ने कर्ज ले रखे हैं। अब लोगों को उन्हीं कर्ज की ज्यादा किस्त देनी पड़ रही है। एक तरफ आमदनी ठीक से नहीं बढ़ रही है दूसरी तरफ कर्ज की किस्त बढ़ रही है। यानी न पैसा रहेगा न लोग बाजार में सामान खरीदने जाएंगे। फिर काहे की महंगाई।

लेकिन यह हकीकत नहीं है। लोग को जरूरी सामान खरीदना ही है, किस्त देनी ही है, हां खानपान के बिल में जरूर कुछ कटौती हो सकती है सो सब तरफ दिख रही है।

अब आते हैं निवेश की बात पर, क्योंकि यही समय है जब लोगों को यह फैसला करना होता है कि मुद्रास्फीति की दर को पीछे छोड़ने के लिए कहां पैसा लगाया जाए। क्योंकि एफडी और पोस्ट आफिस के विकल्प को निवेश की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता है। सीधा सीधा कहा जाए तो निवेश उसे ही कहना सही होगा जो मुद्रास्फीति की दर को मात दे सके। यानी जितना मुद्रास्फीति की दर हो उससे ज्यादा रिटर्न निवेश पर मिले। इस तरह के रिटर्न के लिए बाजार में प्रापर्टी के अलावा शेयर बाजार और म्यूचुअल फण्ड ही मौजूद हैं।

प्रापर्टी बाजार में निवेश कम पैसे में संभव नहीं है। अगर पैसा है तो इस बाजार में निवेश के बारे में जरूर सोचना चाहिए। लेकिन साथ ही निवेश सही प्रापर्टी में करने के अलावा उसकी देखरेख भी पूरी तरह से करनी चाहिए। अगर प्लाट है तो उसकी बाउंड्री जरूर कराएं और समय समय पर उसको देखते रहें। अगर फ्लैट लिया है और आप पहले से ही अपने मकान में हैं तो उसको किराए पर ही उठाएंगे। ऐसे में जरूरी है कि किराएदार का चुनाव देखसुन कर करें। अगर किसी के पास पैसा है और इतनी देखरेख करने की क्षमता तो प्रापर्टी का निवेश फायदेमंद है, और यह निश्चित रूप से मुद्रास्फीति को मात देने वाला है।

लेकिन अगर यह चीजें नहीं हैं और मुद्रास्फीति से लड़ना भी चाहते हैं तो शेयर बाजार मौजूद है। यहां पर अगर किसी ने सही जगह पर और सही तरीके से निवेश कर रखा है तो वह भी मुद्रस्फीति से लड़ाई जीत सकता है। वैसे भी मई ही है यानी आयकर बचाने की शुरुआत। ऐसे में अच्छे आयकर बचत म्यूचुअल फण्ड में निवेश से भी काम बन जाएगा। एक तो आयकर बचेगा दूसरा अच्छा रिटर्न भी मिल सकेगा। फिडेलिटी, रिलायंस और एचडीएफसी के टैक्स सेवर फण्ड ने तीन साल में 40 से लेकर 48 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है।

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