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एस दिव्यदर्शिनीः संकल्प ने बनाया सर्वश्रेष्ठ

चेन्नई की 24 साल की एस़ दिव्यदर्शिनी यूपीएससी की प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में टॉप पर रहीं। इसके पहले भी वह इस परीक्षा में बैठी थीं, पर नाकामयाब रही थीं। मध्यमवर्गीय परिवार की दिव्यदर्शिनी इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी के लिए चुनी गईं, लेकिन उन्होंने अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। उन्हें भरोसा था कि उनका चयन आईएएस के लिए हो जाएगा, लेकिन वह टॉप पर रहेंगी, इसकी कल्पना भी नहीं थी। एस.दिव्यदर्शिनी की इस महत्वपूर्ण सफलता के कुछ सूत्र :

कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं
बड़े लक्ष्य को पाना हो, तो कोई शॉर्टकट नहीं चलता। आर्ट्स में डिग्री हासिल करने के बाद लॉ की पढ़ाई के साथ-साथ यूपीएससी की भी तैयारी करने वाली दिव्यदर्शिनी मानती हैं कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। नियमित पढ़ाई हो या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, केवल और केवल कड़ी मेहनत कामयाबी पाने की पहली सीढ़ी है। कामयाबी के लिए और भी कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन कड़ी मेहनत के बिना वे सभी बातें बेकार हो जाती हैं। शॉर्टकट के जरिये अगर कामयाब होने का सपना देख रहे हों, तो उसे भूल जाइए।

उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें
बिना मार्गदर्शन के भी कामयाबी मिल सकती है, लेकिन इसमें आपका सफर लंबा और मुश्किल हो सकता है। वर्ष 2009 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा देने के बाद मुझे यही महसूस हुआ। हर परीक्षा का कोई न कोई पैटर्न होता है। अगर आपको उसकी जानकारी हो, तो वह मदद मिल जाती है। मैंने जब इस परीक्षा की कोचिंग के बारे में सोचा, तो कई लोगों ने कहा कि आप तो पहले ही यह परीक्षा दे चुकी हैं, फिर कोचिंग की क्या जरूरत? लेकिन आज मैं मानती हूं कि अगर मैंने कोचिंग नहीं ली होती, तो टॉप में आना तो दूर, शायद सफल ही नहीं हो पाती।

योजनाबद्ध होकर पढ़ाई करें
यदि आपको भी इस या ऐसी ही कोई परीक्षा में बैठना है, तो कोचिंग जाना और कड़ी मेहनत करना ही काफी नहीं है। आपको पूरी योजना बनकर पढ़ाई करनी चाहिए। इसके लिए आपको हर एक विषय में अध्ययन की रणनीति बनानी होगी। हर विषय के लिए अलग रणनीति होनी चाहिए, क्योंकि कुछ विषयों में आपकी खास दिलचस्पी हो सकती है, कुछ में नहीं। लेकिन पढ़ाई तो आपको सभी विषयों की करनी होगी। जो विषय आपको बोरियत भरे लगते हैं, उनमें भी दिलचस्पी लें। मेरा अनुभव यही है कि जैसे-जैसे हम किसी विषय के बारे में जानने लगते हैं, तो हमारी दिलचस्पी उसमें बढ़ती जाती है।

हताश होने से बचें
मुझे दसवीं कक्षा में आए नंबरों से बड़ी निराशा हुई थी। मुझे रिजल्ट में विशेष योग्यता की आशा थी, लेकिन मैं 74 प्रतिशत ही ला सकी। उस वक्त मेरे माता-पिता ने बहुत प्रेरणा दी। मैंने अगले साल नए सिरे से पढ़ाई शुरू की और बारहवीं की परीक्षा में 86 प्रतिशत नंबर लाकर अपना खोया हुआ आत्मविश्वास फिर से हासिल कर लिया। कॉलेज में आते ही मैंने प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने का मन बना लिया था। मेरी दिलचस्पी मैनेजमेंट और कंप्यूटर्स की बजाय कानून में ज्यादा थी। यह एक स्कोरिंग विषय भी है। यदि आप परफेक्ट हैं, तो अच्छे नंबर पा सकते हैं। यूपीएससी में पहली नाकामी को मैंने यह सोचकर टाल दिया था कि मैंने कॉलेज में लॉ के साथ-साथ वह परीक्षा दी थी।

हर विषय को पढ़ने का लाभ
आपकी दिलचस्पी चाहे जिस विषय में हो, लेकिन पढ़ाई हर विषय की करते रहें। यह हमेशा ध्यान रखिए, केवल कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षाओं के विषय पढ़ना ही काफी नहीं है। ज्यादा से ज्यादा विषयों की पढ़ाई आपको इंटरव्यू में तो मदद करेगी ही, आपको एक बेहतर, मुकम्मल इंसान बनाने का रास्ता भी खोलेगी। आगे जाकर आप पाएंगे कि हर विषय की पढ़ाई से आपने जो भी सीखा है, वह बहुत ही काम का है और तब आपको खुशी होगी।

बर्बाद न करें वक्त
टीवी और फिल्में देखना, ड्राइविंग करना, चैटिंग करना, मोबाइल पर गप्पें लड़ाना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन ये सभी टाइम किलिंग डिवाइसेस हैं। इनका उपयोग सावधानी से करें। ये आदतें वक्त तो बर्बाद करती ही हैं, हमें अपने लक्ष्य से भी भटका सकती हैं। अगर आप समझदार हैं, तो इनका उपयोग अपने लक्ष्य को पाने में सहयोगी उपकरण के तौर पर कर सकते हैं, लेकिन यह आसान नहीं है। यही सोचिए कि इन सभी चीजों के लिए तो जिंदगी पड़ी है।

लक्ष्य के लिए समझौता नहीं
अपने लक्ष्य को पाने के लिए कभी समझौते न करें। जो लक्ष्य तय किया है, उसे न केवल प्राप्त करें, बल्कि सही रास्ते पर चलकर ही हासिल करें। यह बात किताबी लग सकती है, लेकिन कामयाबी का असली मजा तभी है, जबकि उसे पाने के लिए आपने कोई समझौता नहीं किया हो। यूपीएससी में पहली बार नाकाम होने पर मैंने बैंक की नौकरी के लिए हां कर दी और वहां काम भी शुरू कर दिया, लेकिन मुझे लगता रहा कि मैं अपने लक्ष्य से भटक गई हूं। बैंक की नौकरी में शायद तनाव कम होंगे, लेकिन मेरा लक्ष्य प्रशासनिक नौकरी ही था, और मैं इसे पाकर खुश हूं।

व्यवस्था बदलने की चाहत
मुझे देश में फैले भ्रष्टाचार से नफरत है और मैं उसे मिटाना चाहती हूं। और सिर्फ गालियां देने या कुंठित होने की बजाय भ्रष्टाचार से लड़ने का सही तरीका मुझे यही लगता है कि मैं ऐसी स्थिति में पहुंच जाऊं, जहां से मैं करप्शन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकूं। मेरा आत्मविश्वास कहता है कि आईएएस अधिकारी के रूप में मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचा सकूंगी।

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