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कृषि-उद्योग में संतुलन साधने से मिली ममता को जीत

माकपा के 34 साल के शासन को खत्म करने में ममता बनर्जी की सफलता कृषि और उद्योग क्षेत्र की आकांक्षाओं के बीच संतुलन साधने एवं राज्य के विकास पर आधारित है।

बनर्जी ने खुद को गरीबों का नेता, अल्पसंख्यकों का दोस्त और समग्र विकास के पक्षधर के तौर पर पेश कर विधानसभा की 294 में से 184 सीटों पर जीत दर्ज की।

उन्होंने किसानों के इस भय को भुनाया कि उनकी जमीन उद्योग के लिये छीनी जा सकती है, जबकि निवेशकों को यह आश्वस्त करने में सफल रहीं कि उनके हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।

उत्तर बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चे की तुलना में ज्यादा कमजोर तृणमूल कांग्रेस इलाके में बड़ी ताकत के रूप में उभरी। इन इलाकों में रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन कर एवं क्षेत्र में आवागमन की सुविधा को सुधारकर उन्होंने विकास का कार्ड खेला।

उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने 54 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि इसके सहयोगी कांग्रेस ने 17 सीटें जीतीं।

इस बार वाम मोर्चा को सिर्फ 16 सीटें मिलीं जिसने 2006 में 38 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा को तीन सीट और निर्दलियों ने दो सीटों पर कब्जा किया।

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