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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कोसी व बागमती नदी में पायलट चैनल का निर्माण हुआ तो चौथम प्रखंड के बोरने गांव का अस्तित्व समाप्त हो सकता है। गांव के लोगों को यहां से हटाने के लिए सरकार को बड़ी मुआवजा राशि का भुगतान भी करना होगा, जो एक महंगी और लंबी प्रक्रिया होगी। हालांकि ग्रामीणों के विरोध के बाद मौके का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट पर अमल हो तो गांव भी बच जाएगा और बांध की सुरक्षा भी की जा सकेगी।

भूमि उपसमार्हता पुष्पेष कुमार द्वारा डीएम को सौपी गई रिपोर्ट के अनुसार पायलट चैनल कोसी व बागमती नदी की वर्तमान घारा से मात्र 200-300 मीटर ही दूरी पर प्रस्तावित है। यहां सैकड़ों एकड़ में लहलहाती मक्के की फसल है। जबकि पायलट चैनल का प्रास्तावित मार्ग बागमती नदी के केवटा घाट के पास से सीधे बोरने गांव को जोड़ना है। जिससे बोरने गांव के अस्तित्व पर तो संकट है ही सैकड़ों एकड़ उपजाऊ खेत व गांव की घनी आबादी पर भी संकट आ सकता है।

आम लोगों के बीच सवाल यह उठ रहा है कि तेगाछी ओर तेलिहार को बचाने के लिए बोरने गांव को खत्म करना कहां तक उचित होगा। या कहें की तेगाछी ओर तेलिहार को बचाने के लिए बोरने को शहीद होना होगा। कैसे बचे बांघ ओर गांव रिपोर्ट के अनुसार पायलट चैनल बनाने के बजाय बांध की ओर से कई मजबूत ठोकरों का निर्माण तथा बोल्डर तार की जाली में डालकर नदी के किनारे डाल दिए जाएं तो नदी का कटाव बांध की ओर कम हो जाएगा। इससे तेगाछी ओर तेलिहार तो बचेगा ही बोरने को भी कटने से बचा लिया जाएगा।

अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि ठोकर बनाने का काम तथा बोल्डर क्रेटिंग नदी में कुछ दूरी तक की जाय तो नदी खुद ही बांध तथा बस्ती से दूर हो जाएगी। इसके अलावा नदी के दोनों किनारों पर बांस के पेड़ रोपने का एक अभियान भी चलाया जा सकता है। जिससे तटबंधों को नदी की धारा तथा बाढ़ के समय कटाव से सुरक्षा मिल सकेगी। पायलट चैनल के बदले तेगाछी और तेलिहार को बचाने के लिए बेडबार बनाने की योजना विभाग को भेजी गयी है। जिस पर अब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। संवेदक को पायलट चैनल के निर्माण की मनाही की गई है।

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  • Web Title:तेगाछी और तेलिहार को बचाने में बोरने होगा शहीद!