DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्टैनली का डब्बा

स्टैनली का डब्बा

कहानी: एक स्कूल है, जिसमें सारा फोकस चौथी क्लास के बच्चों पर है। क्लास में स्टैनली (पार्थो) बहुत ही इंटेलीजेंट और मेहनती है और पूरे क्लास के बच्चों का चहेता भी। स्टैनली अपने दोस्तों को अपने जिंदगी की झूठ-मूठ की एडवेंचरस कहानियां सुनाता है, जिन्हें सुन कर सभी खूब इंजॉय करते हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब स्टैनली की क्लास का हिन्दी टीचर बाबूभाई वर्मा (अमोल गुप्ते) अपने खाने की आदत से मजबूर होकर स्टैनली के ही क्लास के अमन वर्मा की टिफिन पर रोज-रोज हाथ साफ करने के चक्कर में रहता है। स्टैनली कभी टिफिन नहीं लाता और सारे दोस्त उसे अपने साथ खाना शेयर करवाते हैं। बाबूराम को लगता है कि स्टैनली के वजह से वह खाना नहीं खा पा रहा तो वह स्टैनली को टिफिन के साथ ही आने की हिदायत देकर उसको स्कूल से भगा देता है। स्टैनली की इंग्लिश टीचर मिस रोजी (दिव्या दत्ता), जो उसको बहुत मानती थी, बाबूराम की बेइज्जती करती है। और बाबूराम कभी न आने का वादा कर स्कूल से चला चला जाता है।

निर्देशन: अमोल गुप्ते का निर्देशन जानदार है। उन्होंने बच्चों की क्लास को जिस तरह से दर्शाया है, वह काबिले-तारीफ है।

अभिनय: पार्थो के अलावा फिल्म के सारे बच्चों का अभिनय काफी अच्छा है। रियल लाइफ में एक दूसरे पर जान छिड़कने वाले पिता-पुत्र यानी कि अमोल और पार्थो की फिल्म में तनातनी बेहतरीन है। 

गीत-संगीत: संगीत के लिहाज से फिल्म में कुछ खास नहीं है, लेकिन बैकग्राउंड में बजने वाला भावपूर्ण गीत कर्णप्रिय है।

क्या है खास: अमोल गुप्ते यानी खड़ूस का टिफिन के लिए बच्चों के आगे-पीछे भागना काफी मजेदार है।

क्या है बकवास: एक टीचर का सिर्फ खाना खाने के लिए किसी इंटेलीजेंट बच्चे को स्कूल से निकाल देना पचता नहीं है।

पंचलाइन: चलते-चलते फिल्म का खत्म हो जाना बच्चों को पसंद नहीं आएगा।

सितारे : दिव्या दत्ता, अमोल गुप्ते, पार्थो, राज जुत्शी आदि
निर्माता: अमोल गुप्ते
निर्देशक: अमोल गुप्ते
संगीत: हितेश सोनी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्टैनली का डब्बा