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‘बाहर देखते नहीं, अंदर झांकते हैं सीसीटीवी’

दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में लगे सीसीटीवी कैमरे भले ही सुरक्षा पुख्ता करने के लिए लगाए गए हो लेकिन यह लड़कियों की प्राइवेसी में दखल डाल रहे हैं। इस मुद्दे पर छात्राएं और डीयू प्रशासन अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। इसके लिए छात्राओं ने प्रॉक्टर से लिखित में शिकायत भी दर्ज कराई है। प्रशासन का तर्क है कि लड़कियां ऐसा देर से हॉस्टल आने पर पकड़े जाने से बचने के लिए कर रही है तो लड़कियों का कहना है कि इससे उनकी निजता पर लगाम लगती है।

डीयू में पढ़ने वाली छात्र साक्षी (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि मैंने आर्थिक आधार और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीयू के ही अंबेडकर गांगुली हॉस्टल में रहने का फैसला किया था, लेकिन हॉस्टल में सीसीटीवी लगने से लड़कियों की निजता खत्म हो रही है। हालांकि सुरक्षा के नजरिए से यह एक बेहतर कदम जरूर है पर इसके लिए हॉस्टल की लॉबी और मुख्य प्रवेश द्वार पर कैमरे लगाना सही नहीं है। डीयू प्रशासन को हॉस्टल की बाउंड्री पर सीसीटीवी लगाने चाहिए ताकि वहां से कोई अंदर ना सके। इसके लिए प्रॉक्टर को भी सूचना दे दी है। पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

वहीं इसके विपरीत हॉस्टल की इंचार्ज रौशल पिंटो का कहना है कि सीसीटीवी लगने से लड़कियों को दिक्कत इसलिए है क्योंकि इससे उनका हॉस्टल के निर्धारित समय से लेट आना पकड़ा जा सकता है। हॉस्टल में लड़कियों के आने का समय नौ बजे है। इसके अलावा इन्हें महीने में 12 दिन, रात 11 बजे तक आने की अनुमति भी है। यही नहीं वह आठ अपने किसी परिचित, घर पर भी रह सकती हैं। डीयू में कुल 13 हॉस्टल हैं जिनमें हरेक में करीब 120 लड़कियां रह रही हैं। अब तक इनमें से सिर्फ दो ही हॉस्टल में सीसीटीवी लगे हैं।

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