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बंक मारा तो पापा लेंगे ‘क्लास’

नए सत्र से वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर उपस्थिति की जानकारी लगाने का प्रस्ताव

दिल्ली विश्वविद्यालय में अब नए सत्र से छात्रों के साथ-साथ अभिभावक घर बैठे ही अपने लाडले की उपस्थिति कम से कम हफ्ते में एक बार जान सकेंगे। इस साल सेमेस्टर सिस्टम के साथ ही छात्रों को उनकी उपस्थिति का ब्योरा भी नए तरीके से दिया जाएगा। विवि प्रशासन कॉलेजों को इस बात का सुझाव देने जा रहा है कि नए सत्र से कॉलेज हर छात्र की उपस्थिति अपनी वेबसाइट या नोटिस बोर्ड पर लगाएं जिससे छात्रों को पहले से ही इसकी जानकारी मिल जाए।

इसका फायदा ये होगा कि छात्रों को पहले से उनकी कम उपस्थिति के बारे में जानकारी मिल जाएगी जिससे वह समय रहते इसे पूरा कर सकेंगे। मुख्य बात ये है कि पहले ये जानकारी अनौपचारिक तौर पर मिलती थी वहीं अब ये प्रत्येक हफ्ते मिलना संभव होगी। माना जा रहा है कि उपस्थिति की ये जानकारी न्यूनतम एक हफ्ते में और अधिकतम एक माह में उपलब्ध हो जाएगी।

डीयू के छात्रों द्वारा दिए गए इस सुझाव को विश्वविद्यालय प्रशासन सकारात्मक तौर पर ले रहा है। डीन स्टडेंट्स वेलफेयर जे.एम.खुराना का कहना है कि उपस्थिति का ब्यौरा हर हफ्ते या महीने में देना छात्रों के हित में होगा। यह एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। उन्हें साथ के साथ अपनी उपस्थिति की पूरी जानकारी मिलती रहेगी। हम कॉलेजों से कहेंगे कि वह नए सत्र से इसे अपनाएं और छात्रों की उपस्थिति की जानकारी अपनी सुविधानुसार छात्रों को बताएं। रामलाल आंनद कॉलेज के प्राचार्य वी.के.शर्मा ने बताया कि अगर ऐसा हो जाता है तो छात्रों को बहुत फायदा मिलेगा।

हर साल उपस्थिति कम होने की वजह से परीक्षाएं न देने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही नहीं इस वजह से छात्रों को शिक्षकों से शिकायत रहती है कि वह रोजाना उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं जिससे उपस्थिति कम हो जाती है। डीयू के एक छात्र का कहना है कि अगर कोई छात्र हफ्ते में चार दिन आता है पांचवें दिन नहीं और शिक्षक उसी दिन उपस्थिति ले लेता है तो औपचारिक तौर पर वह छात्र पूरे सप्ताह के लिए अनुपस्थित माना जाएगा। अगर उपस्थिति के लिए इस तरह को प्रावधान तय हो जाता है तो इससे छात्रों को बहुत फायदा मिलेगा।

रामलाल आनंद कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि पहले जहां सालाना आधार पर छात्रों की उपस्थिति निकाली जाती थी वहीं अब सेमेस्टर सिस्टम में छह महीने में एक बार ऐसा करना होगा। यदि यह प्रक्रिया लागू हो जाती है तो उपस्थिति का ब्यौरा पारदर्शी हो जाएगा।

क्या था पहले का तरीका

पहले कॉलेज छात्रों की साल में एक बार ही उपस्थिति जारी करते थे। वहीं कुछ कॉलेज यूनिट टेस्ट में भी यह दिखा दिया करते थे। लेकिन सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से यूनिट टेस्ट बाध्यकारी नहीं होगा।

क्या होंगे फायदे

कम उपस्थिति वाले छात्रों को पहले से ही पता होगी उपस्थिति
शिक्षकों को भी रखना पढ़ेगा पूरा ब्यौरा
छात्र के अलावा अभिभावक भी घर बैठे जान सकेंगे उपस्थिति
कम उपस्थिति को पहले सुधारने का होगा मौका
किसी दिन आएं और उपस्थिति नहीं लगी, तो इसके बारे में भी हो सकेगी पहले से पुष्टि
न्यूनतम सात दिन और अधिकतम एक माह में मिलेगी जानकारियां

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