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कंडक्टर की बिटिया ने कर दिया कमाल

राजस्थान के छोटे से गांव सोडा से महिला सरपंच बनने वाली छवि राजावत का नाम लोगों की जुबान पर चढ़ा ही था कि अनजान से इलाके से प्रतिभा की अनोखी चमक बिखेरती एक और युवती का नाम इसी कड़ी में जुड़ गया। जोधपुर के ही एक और गांव की नीतू सिंह ने विषम परिस्थितियों के बाद भी हार नहीं मानी और सिविल सर्विस की परीक्षा पास की है। सिविल सर्विस पास करने और आईआरएस बनने पर नीतू सिंह कुछ हैरत में हैं और बहुत अधिक खुश भी। आखिर उसने अपने पिता का सपना तो पूरा किया ही, साथ ही उस इलाके से वह निकलकर इस मुकाम पर पहुंची हैं, जहां लड़की की पढ़ाई तो दूर उनका घर से बाहर निकलने में भी कई तरह की बंदिशें हैं।

अपनी सफलता पर नीतू कहती हैं ‘मैंने शुरू में ही यह ठान लिया था कि पिताजी बस कंडक्टर होने के बावजूद भी यदि मुझे ऑफीसर बनते देखने के लिए हर तरह की मुसीबत झेल रहे हैं तो आखिर मैं उनके विश्वास और सपने को कैसे तोड़ सकती हूं, मुझे उनका भरोसा पूरा करना था। अब इसे मां-बाप का आर्शीवाद कहें या फिर पिताजी की हसरत को पूरा करने की ललक कि सिविल सेवा की परीक्षा पास करने में सफलता मिली है।’ सिविल सर्विस की परीक्षा में नीतू सिंह को 653 रैंक मिला है। नीतू को इंडियन रेवेन्यू सर्विस मिला है। उसने अपनी तैयारी के लिए घर छोड़ने के विषय में बताया कि यूपीएससी की तैयारी के लिए जोधपुर से दिल्ली आना हिमालय पर्वत पर चढ़ने के सामान था। लेकिन, मेरे पिताजी ने समाज की सारी बंदिशों को तोड़कर दिल्ली भेज दिया। इसमें मेरी छोटी बहन पंकज सिंह का भी बहुत बड़ा योगदान रहा।

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