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दिखी राजस्थानी संस्कृति की अनोखी झलक

ारवां 2008 में आये प्रतिनिधियों ने आयोजन की खूब सराहना की। संबलपुर शाखा के सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि यहां व्यवस्था काफी अच्छी थी। ऐसा आतिथ्य सत्कार शायद ही फिर देखने को मिले। उत्कल शाखा के श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि यहां का आयोजन भव्य और मनमोहक था। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आयें। असम के दीपक कनोई ने कहा कि जिस प्रकार का यहां आयोजन किया गया। उसका बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल से आये राकेश नाहर ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से सामाजिक कार्यो को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ मुहिम चलाने की बात कही। पटना की प्रमिला शर्मा ने कहा कि व्यवस्था को शब्दों से नहीं बताया जा सकता है। रांची आकर अपनापन सा लगा। बिहार की सरिता बजाज ने कहा कि इतना सुव्यवस्थित आयोजन शायद पहले कभी भी नहीं देखा था। उन्होंने विकलांग रहित हो भारत महान का नारा दिया। गुवाहाटी की नीलम भजनका ने कहा कि यह कार्यक्रम बहुत ही अच्छा लगा। ऐसा लगा जसे अपने घर पर हूं। गुवाहाटी के रवि अजीत सरिया ने कहा कि इतनी भीड़ वाले आयोजन में बेहतर व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी थी।ड्ढr पाकुड़ शाखा के जीतेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि आयोजन में राजस्थानी परंपरा, संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिली।ड्ढr हैदराबाद के नारायण सिंह राजपुरोहित ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में नया जोश देखने को मिला। गुमला के नटवर अग्रवाल ने आयोजन की सराहना की । उन्होंने कहा कि यहां व्यवस्था अच्छी थी। ं

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