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ईंट भट्ठे से कुलपति पद तक

जब आप एसआर लाखा के बारे में बात करेंगे, तो लगेगा जैसे कोई फिल्म देख रहे हैं। एक अद्भुत फिल्म, जो हर किसी के लिए प्रेरणा हो सकती है। सफलता को पाने की ललक, जिद और जुनून उनके पूरे जीवन में साफ दिखता है। 

बचपन में अपने मां-बाप के साथ उन्होंने ईंट-भट्ठे पर काम किया, लेकिन हार नहीं मानी। पढ़ाई के दौरान कई बार घर से स्कूल की दूरी बढ़ने के बावजूद वह हर बार उसका पीछा करते रहे।

चप्पल पहनने से कितनी राहत मिलती है, यह वह आठवीं कक्षा के बाद जान पाए। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद लाखा सिविल सर्विस की परीक्षा पास करके कलेक्टर बने। इसके बावजूद वह अपने गर्दिश के दिनों को कभी नहीं भूले और 30 साल के करियर में हर वक्त समाज की बेहतरी के लिए काम करते रहे। 

चाहे तमाम जिलों में कलेक्टर का पद हो, या सोशल सेक्टर में रहे हों या फिर यूपी के 570 आईएएस में से सबसे भ्रष्ट तीन नौकरशाह चुनने की बात हो, हर नई जिम्मेदारी के साथ लाखा ने साबित किया कि उनसे बेहतर इसे कोई नहीं कर सकता था।

रिटायर होने के बाद एसआर लाखा इन दिनों एक नई जिम्मेदारी के लिए कमर कस चुके हैं। हाल ही में उन्हें ‘गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय’ के कुलपति पद की जिम्मेदारी दी गई है। जिस 12 मार्च (1949) को उन्होंने इस दुनिया में आंखें खोलीं और अपनी मेहनत और लगन से हर कदम पर सफलता हासिल की, उसी 12 मार्च (2011) को उन्होंने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति पद को संभाला और अब वह इसे एक अलग पहचान दिलाने का बीड़ा उठा चुके हैं।                       

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  • Web Title:ईंट भट्ठे से कुलपति पद तक