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राहुल की पहल

भट्टा पारसौल में किसानों का भला हो या न हो, राजनीति के चूल्हे जरूर गरम होने लगे हैं। राहुल गांधी ने वहां जाकर और किसानों को भरोसा देकर एक सराहनीय कार्य किया है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल कुछ करने की बजाय अब राहुल गांधी के एक बयान पर बखेड़ा करने लगे हैं, हालांकि राहुल ने जो कहा था, उसका भाव वे भी बखूबी समझते हैं। राहुल अच्छे वक्ता नहीं हैं, पर आज देश को अच्छे वक्ता की नहीं, अच्छे कर्ता की जरूरत है। खाली भाषणों में क्या रखा है? राहुल गांधी अगर ऐसे ही कार्य करें, तो जनता निश्चित रूप से उनके साथ चलेगी। किसानों के हित में उन्हें मायावती सरकार से दो-दो हाथ करने पड़ें, या फिर केंद्र सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए ही प्रेरित करना पड़े, वह जरूर ठोस कदम उठाएं, ताकि निर्माण कंपनियों और सरकार की मिलीभगत से किसानों के हितों को चोट न लगने पाए।
पंकज गुप्ता, अंबेडकर नगर, दिल्ली

वाह री देशभक्ति
अमेरिका ने अपने दुश्मन ओसामा को पाकिस्तान में घुसकर मार गिराया, लेकिन हम अफजल गुरु और अजमल कसाब को अब तक फांसी न दे सके। हमें मेहमान नवाजी की आदत जो है। क्या वसुधैव कुटुंबकम का दर्शन यही है? क्या यही है हमारी देशभक्ति?
वैभव धनराज

दोष हमारा है
कुछ ही समय पहले फिल्म कलाकार अनुपम खेर ने मौजूदा संविधान को बदलने की बात कही थी। इस तरह की मांग पहले भी होती रही है। इसके मूल में भारतीय संविधान के बारे में लोगों का अल्पज्ञान है। जब भारतीय विद्वानों द्वारा संविधान का निर्माण किया गया था, तो संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर ने कहा था, ‘मैं यह महसूस करता हूं कि भारतीय संविधान व्यावहारिक है, इसमें परिवर्तन क्षमता है। इसमें शांति काल और युद्ध काल में देश की एकता को बनाए रखने की सामथ्र्य है। यदि नवीन संविधान के अंतर्गत देश की स्थिति खराब होती है, तो हमें यह कहना होगा कि मनुष्य ही दुष्ट हैं, न कि संविधान दोषपूर्ण है।’ वास्तव में हमारे संविधान का निर्माण सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। समय के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है, इसलिए इसमें संशोधन करने की भी व्यवस्था है, परंतु जब इसे लागू और पालन करने वाले मनुष्य ही बुरे होंगे, तो चाहे कितना भी अच्छा संविधान हो, देश का संचालन ठीक ढंग से नहीं हो पाएगा और यदि मनुष्य अच्छे हों, तो औसत दर्जे के संविधान से भी अच्छी शासन-व्यवस्था संचालित होती रहेगी, क्योंकि करना तो सब हमें ही है।
आलोक चौबे, भवनाथपुर

कहां जा रही भाजपा
भाजपा कांग्रेस के वंशवाद पर बहुत चिल्लाती है, पर उसको अपनी पार्टी के अंदर की बुराई दिखाई नहीं पड़ती है। आजकल भाजपा नेता हर मंच से यह दावा करते हैं कि उनके द्वारा शासित राज्य अच्छा काम कर रहे हैं, पर वास्तविकता इससे कुछ अलग ही है। उनके नेता अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं, चाहे वह झारखंड हो या हिमाचल या उत्तराखंड, हर जगह भाजपा नेता अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं। अत: जरूरी है कि भाजपा पहले अपने घर को सुधारे, तब किसी दूसरी पार्टी की छवि पर प्रहार करे।
निशिकांत कर्ण, गौतमनगर, सहरसा

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