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पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा का 34 साल का शासन समाप्त

पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा का 34 साल का शासन समाप्त

पश्चिम बंगाल में वर्ष 1977 में सत्तारूढ़ होने और लगातार सात बार जीत दर्ज करने के बाद वाममोर्चा, ममता बनर्जी के नेतृत्व में परिवर्तन की आंधी में अपनी सरकार की पतवार थामने में विफल रहा और राज्य में लगातार 34 साल से जारी वामपंथी शासन की समाप्ति हो गयी।

राज्य में भूमि सुधार जैसे असाधारण कार्य की बदौलत वर्ष 1977 में सत्ता में आने वाले वाममोर्चा के इस कदम का इतना सकारात्मक असर हुआ कि राज्य में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती गई और मोर्चा ने 34 साल तक निर्बाध रूप से शासन किया।

आर्थिक उदारीकरण के दौर में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में छठी वाममोर्चा सरकार ने 2001 में शानदार ढंग से शुरुआत की और 294 में 199 सीटों जीत दर्ज की।

इसके बाद बुद्धदेव के कार्यकाल में 2006 में हुए विधानसभा चुनाव में भी मोर्चा ने 235 सीट हासिल कर भारी जीत दर्ज की। यह क्रम 2008 तक चला जब राज्य में हुए पंचायत चुनाव में तस्वीर बदल गई और मोर्चा को पहली बार परायज का मुंह देखना पड़ा।

वाममोर्चा का पराभव उस समय शुरू हो गया जब बुद्धदेव जनता की बजाए कारपोरेट क्षेत्र के पसंदीदा बन गए।

मई 18, 2006 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बुद्धदेव टाटा सन्स के अध्यक्ष रतन टाटा के साथ रायटर्स बिल्डिंग से छोटी नैनो कार परियोजना की घोषणा करते दिखे।

बुद्धदेव ने अपने दूसरे कार्यकाल में राज्य में कामकाज की संस्कृति में बदलाव की वकालत करते हुए अभी करो का नारा दिया। लेकिन बंद एवं हड़ताल के लिए बदनाम रहे इस राज्य में बुद्धदेव के इस नारे ने असमय ही दम तोड़ दिया।

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