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पाक में लादेन की मौजूदगी की जांच हो : मनमोहन

पाक में लादेन की मौजूदगी की जांच हो : मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों और वांछित आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिका की तर्ज पर कार्रवाई करने की संभावनाओं को हालांकि खारिज कर दिया है, लेकिन उन्होंने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के इतने लंबे समय तक पाकिस्तान में रहने संबंधी मामले की पूरी जांच करने की मांग की है।

डा. सिंह ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपित हामिद करजई के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लादेन के पाकिस्तानी सेना की नाक के नीचे एबटाबाद में मिलने से दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई में लादेन के एबटाबाद में मारे जाने से यह आशंका पैदा होना लाजिमी है कि क्या लादेन पाकिस्तानी सैन्य बलों की मदद से वहां रह रहा था।
 
डॉ. सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले में मेरी पहली प्रतिक्रिया यह है कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि लादेन इतने लंबे समय तक पाकिस्तान में रहने में कैसे सफल हुआ। उन्होंने कहा कि भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है और पाकिस्तान को इस मामले में स्वयं को असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए। सिंह ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के संबंधों का मकसद किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाना नहीं है।

उन्होंने कहा कि एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि अपने निजी हित साधने के लिए देश की नीति में आतंकवाद का हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं। यह पूछने पर कि क्या भारत भी पाकिस्तान में वांछित आतंकवादियों को निशाना बनाकर अमेरिका की तर्ज पर कार्रवाई करने की योजना बनाएगा, सिंह ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मसला है और हम आतंकवाद के खिलाफ हमारी रणनीतियों पर संवाददाता सम्मेलन में चर्चा नहीं करते हैं। लेकिन उन्होंने इसके साथ ही कहा कि मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत अमेरिका की तरह नहीं है।

प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसियों की इस टिप्पणी को चिंताजनक बताया कि जलालाबाद में भारतीय महावाणिज्य दूतावास को निशाना बनाकर आतंकवादी हमले की साजिश रचने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने भारतीय महावाणिज्य दूतावास पर हमले की साजिश रच रहे दो लोगों को गिरफ्तार करने के बाद कहा था कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस साजिश के पीछे आईएसआई का हाथ है।

हमले की साजिश रच रहे इन दोनों आरोपियों के पास से दो लाख 60 करोड़ पाकिस्तानी रुपए बरामद किए गए हैं। सिंह ने इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कहा कि यदि आपने जो कहा वह सच है तो यह काफी चिंताजनक बात है। यहां प्राप्त रिपोर्टों में बताया गया था कि पूर्वी अफगानिस्तान में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमलों के लिए एक विदेशी खुफिया एजेंसी कुछ लोगों को धन और हथियार मुहैया करा रही थी।

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