DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिहार पंचायत चुनाव: सभी चाहते हैं मुखिया बनना

बिहार में चल रहे पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा उठापटक मुखिया पद को लेकर है। सबसे अधिक प्रत्याशी इसी पद के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जानकार मुखिया जैसे पद के लिए अधिक मारामारी की वजह इसका 'मलाईदार' होना बताते हैं।

राज्य निर्वाचन विभाग के सह सचिव एवं जनसम्पर्क अधिकारी राजीव राठौड़ के अनुसार पंचायत चुनाव में मुखिया पदों के लिए सबसे ज्यादा उम्मीदवार हैं। राज्य में 8,442 मुखिया पदों के लिए 79,423 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि इतने ही सरपंच पदों के लिए 36,560 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस प्रकार, एक मुखिया पद के लिए औसतन 10 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं, जबकि सरपंच पदों के लिए यह आंकड़ा औसतन चार है।

जानकारों के मुताबिक, मुखिया के पास वित्तीय अधिकार हैं, जबकि सरपंच और पंच के पास केवल न्यायिक अधिकार हैं। यही वजह है कि अधिकांश प्रत्याशी मुखिया पद की दौड़ में हैं।

राजनीतिक विश्लेषक गंगा प्रसाद के अनुसार बिहार में मुखिया के पास विकास को लेकर बहुत अधिकार हैं। राज्य से लेकर केंद्र सरकार द्वारा गांवों में चलाई जा रही सभी योजनाएं मुखिया की देखरेख में ही क्रियान्वित होती हैं।

राज्य में पिछले पांच सालों में करीब ढाई लाख पंचायत शिक्षकों की नियुक्ति मुखिया द्वारा ही की गई, जबकि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं (अधिकृत सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) की नियुक्ति भी उसके माध्यम से ही होती है। वहीं, सरपंच के पास केवल 10,000 रुपये से नीचे की सम्पत्तियों सहित अन्य छोट-मोटे विवादों को हल करने का ही अधिकार है। यही वजह है कि लोग मुखिया बनना अधिक पसंद करते हैं।

राज्य में जहां एक ओर विधायक को विकास के लिए मिलने वाली राशि बंद कर दी गई है, वहीं मुखिया को अपनी पंचायत में विकास कार्यों के लिए अब भी राशि मिलती है और विकास योजनाओं पर उनका पूरा नियंत्रण रहता है।

इसी तरह, पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला परिषद के अध्यक्ष के लिए भी उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक है। इस पद के लिए एक जगह से औसतन 20 प्रत्याशी मैदान में हैं।

राज्य में पंच पदों के लिए उम्मीदवारों में कोई उत्साह नहीं दिख रहा है। अधिक दावेदारी न होने की वजह से इस पद के लिए कई उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय मानी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक औरंगाबाद के दाऊदनगर प्रखंड में 50 पंच पदों के लिए किसी ने नामांकन नहीं किया, जबकि 129 पंचों का निर्विरोध जीतना तय है।

मुखियाओं पर हालांकि अपने अधिकारों के बेजा इस्तेमाल की उंगलियां भी उठती रही हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य में 100 से ज्यादा ऐसे मुखिया हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन का आरोप है और जांच चल रही है।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 से राज्य में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। राज्य में पंचायत चुनाव के तहत मुखिया, सरपंच, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम कचहरी पंच, पंचायत समिति सदस्य तथा जिला परिषद के सदस्य के कुल 2,60,650 पदों के लिए मतदान हो रहा है। इन पदों के लिए कुल 5.58 लाख उम्मीदवार मैदान में हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बिहार पंचायत चुनाव: सभी चाहते हैं मुखिया बनना