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ब्रांडेड आइटम का क्रेज

ब्रांडेड आइटम का क्रेज

पहनने का कोई आइटम हो या रोजाना यूज किए जाने वाले प्रोडक्ट। यूथ को तो बस ब्रांडेड ही चाहिए। और ब्रांडेड न सही तो उसके नाम वाला डुप्लीकेट मॉल भी चल जाएगा, बस दिखना ओरिजनल चाहिए। ब्रांडेड आइटम का इतना ज्यादा क्रेज क्यों है? बता रहे हैं विजय मिश्र

शुभांगी ने अपने बर्थ डे के लिए ढेर सारी शॉपिंग की और रात में अपनी सबसे खास दोस्त गर्विता को फोन करके खूब मजे से बताया कि उसने आज क्या-क्या शॉपिंग की। गर्विता ने सारी बात सुनने के बाद पूछा कि उसने कौन से ब्रांड के कपड़े खरीदे हैं? शुभांगी ने कपड़े तो बढ़िया खरीदे, लेकिन वो किसी खास ब्रांड के नहीं थे, इसलिए बताने में झिझक महसूस कर रही थी। उसने बात को उस समय टाल दिया और जब दूसरे दिन वो अपने दोस्तों को ट्रीट देने के लिए गयी तो लगभग उसके बाकी दोस्तों ने भी उसके कपड़ों को देखकर ब्रांड जानना चाहा। शुभांगी ने बताया कि उसने लोकल मार्केट से ही यह शॉपिंग की है सो कोई खास ब्रांड का नहीं मिला। लेकिन वो दिनभर इस बात को लेकर सोचती रही कि काश उसने कंजूसी न की होती और बढ़िया ब्रांडेड कपड़े खरीद लिए होते?

यह किसी एक की सोच नहीं है आज हर लड़का या लड़की ब्रांडेड आइटम पहनना चाहते हैं इसके पीछे की वजह आज के मध्यम वर्ग के युवाओं की सोच में पिछले कुछ सालों में आया बदलाव है। जो यह सोचता है कि उसकी पहचान और समाज में रुतबा ब्रांड की वजह से भी मिलता है। और ये बात काफी हद तक सही भी है। ‘फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन’ वाली बात कहीं न कहीं इसी बात को सही ठहराती है। पीतमपुरा के रहने वाले 19 वर्षीय आकाश को लोकल मार्केट की चीजें पहनना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। आकाश ने बताया कि वो किसी भी शर्त पर लोकल जींस या टी-शर्ट नहीं खरीदता। इसके पीछे आकाश ने तर्क दिया कि पहली बात मैं ब्रांडेड कपड़ों में कहीं ज्यादा कांफिडेंट रहता हूं तो साथ ही ऐसे कपड़े ज्यादा टिकाऊ और फैशनेबल भी होते हैं। मेट्रो सिटीज में छोटे शहरों की तुलना में ब्रांड कांशेसनेस ज्यादा है। इसकी वजह स्टाइल के साथ ही साथ लोगों के बीच अपनी दमदार छवि बनाने की चाहत भी है। गुड़गांव के एक मैनेजमेंट कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम कर रहे मनोज वर्मा ने कहा कि हर स्टूडेंट में एक दूसरे ये बढ़कर ब्रांडेड आइटम को यूज करने की जैसे होड़ लगी हुई है। लड़कियां जहां अपने पर्स, सैंडिल, परफ्यूम, नेल पेंट के ब्रांड को लेकर बातचीत में खासी दिलचस्पी रखती हैं तो वहीं लड़कों में अपने जूतों से लेकर जींस, शर्ट, बेल्ट, टी-शर्ट यहां तक की हेयर जेल के ब्रांड तक का बहुत ज्यादा क्रेज है। अगर कभी ग्रुप डिस्कशन के दौरान ‘ब्रांड’ टॉपिक हो तो इन सबकी जानकारी हैरान कर देने वाली होती है। इन लोगों को ब्रांड की क्वालिटी के साथ ही उसकी पूरी हिस्ट्री भी पता होती है।

लोकल मार्केट के महारथियों ने यूथ में ब्रांडेड आइटम के क्रेज को देखते हुए फेमस ब्रांड से मिलते-जुलते नामों वाले अनेक ब्रांड मार्केट में ला दिए हैं। ये ओरिजनल ब्रांडों के नामों से इतने ज्यादा मिलते-जुलते हैं कि आसानी से इसमें फर्क नहीं किया जा सकता। बाजार में ऐसे भी अनगिनत लोग हैं जो कि ओरिजनल नाम से ही डुप्लीकेट माल बेच रहे हैं। और इनके खरीदारों की भी कोई कमी नहीं है। क्योंकि ये दिखने में बिल्कुल ओरिजनल जैसे ही लगते हैं। और सस्ते होते हैं। ऐसे सामानों के लिए दिल्ली में खास मार्केट भी हैं। इनमें मोनेस्ट्री, लाजपत नगर, सरोजनी नगर, टैंक रोड और गांधी नगर सबसे ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं।

बाजार में ब्रांडेड आइटम की धूम है, लेकिन इनके लिए मोटा पैसा भी देना पड़ता है। साउथ एक्स में रहने वाली रजनी ने बताया कि अगर किसी खास मौके के लिए आपने ऊपर से नीचे तक ब्रांडेड सामानों से लैस होने का मन बना लिया तो कम से कम आपको अपनी जेब से 15 हजार से 20 हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। वहीं जब मैं इसके लिए लाजपत या सरोजनी नगर जैसी मार्केट में जाती हूं तो सबकुछ महज 2 हजार से 3 हजार रुपए में मिल जाता है। इससे बजट भी ठीक रहता है और टशन मारने में कोई कमी भी नहीं रहती।

मार्केट का फर्क

साउथ एक्सटेंशन में ब्रांडेड टॉप की कीमत 400  से लेकर 1600 तक मिल रही है।
वहीं सरोजनी और लाजपत जैसी मार्केट में वैसी ही टॉप महज 150 में उपलब्ध है।

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