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कुरेनाल महावीर प्रसाद की कुल्फी, कूल-कूल

कुरेनाल महावीर प्रसाद की कुल्फी, कूल-कूल

अप्रैल-मई के महीने में जब पारा ऊपर चढ़ने लगता है तो याद आती है कुल्फी की। फिर कदम अपने आप बाजार सीताराम के कूचा पाती राम पहुंच जाते हैं। इस कूचे में दिल्ली की कुल्फी की सबसे पुरानी परंपरा आज भी अपने तौर तरीके से कायम है। इस कूचे में दो मशहूर कुल्फी वालों के परिवार जुड़े हुए हैं। एक हैं बेलीराम और दूसरे हैं कूड़ेमल। आज हम बात करेंगे कूड़ेमल की।

हरियाणा (उस समय वह पंजाब था) से आए कूड़ेमल ने 1908 में इसी कूचा पाती राम में कुल्फी का खोमचा लगाना शुरू किया था। उस समय जब बाजार सीताराम शायद दिल्ली का सबसे आधुनिक और गुलजार बाजार था। और इसके तमाम कूचों में या तो यहां के दुकानदारों और सेठों की हवेलियां थीं या आस-पास के बाजारों में काम करने वाले रहते थे। जल्द ही कूड़ेमल का नाम बाजार सीताराम की अच्छे खानपान की परंपरा से जुड़ गया। समय बदला और नई पीढ़ी आई तो यह खोमचा दुकान में बदल गया। उनके दो बेटे थे और दोनों के नाम पर इस कूचे में कुल्फी की दो दुकाने हैं। एक है कूड़ेमल मोहनलाल कुल्फी वाले और दूसरी कूड़ेमल महावीर प्रसाद कुल्फी वाले। इसी बीच तीसरी पीढ़ी भी कारोबार में सक्रिय हो गई है। लेकिन स्वाद में और कुल्फी बनाने के तरीके में कुछ भी नहीं बदला। वे आज भी वैसे ही कुल्फी बनाते हैं जैसी सौ साल पहले बनाते थे। दुकान में बस एक ही चीज आधुनिक है- कुल्फी को रखने के लिए डीप फ्रिज।

इनकी दुकानों में कुल्फी के इतनी तरह के स्वाद हैं जिनकी शायद आपने कल्पना भी न की हो। परंपरागत केसर पिस्ता और आम की कुल्फी तो है ही, साथ ही यहां आपको गुलकंद, केले, अंगूर और संतरे की कुल्फी भी मिल जाएगी। शरीफे जैसे फल को भले ही हम भूलते जा रहे हैं, लेकिन इस दुकान में वह कुल्फी के बहुत अच्छे  स्वाद में आज भी मौजूद है। यहां कुल्फी का एक और प्रकार भी मिलेगा जिसे कहते हैं स्टफ्ड कुल्फी। यह कुल्फी आम, अमरूद, संतरे, सेब, खरबूजे और लीची जैसे फलों के अंदर रबड़ी भर कर बनाई जाती है।

लेकिन इस दुकान के असली एक्ज़ाटिक स्वाद को कहा जाता है कुल्फी जलपेप्स। यह काफी कुछ चुस्की की तरह होता है। फर्क इतना है कि इसे जमाया जाता है, बर्फ के चूरे पर सिरप डालकर नहीं बनाया जाता। इस कुल्फी में फालसे, जामुन, चीकू,अनार, कीवी, अंगूर, नींबू मसाला और काला खट्टा जैसे अद्भुद जायके तो है हीं, साथ ही आम के पने और इमली का स्वाद भी मौजूद है, जो आपको अच्छा तो लगेगा ही हैरत में भी डाल देगा। ऐसा लगता है कि बाजार में जो भी फल है यहां उसकी कुल्फी जरूर मौजद है। या हो सकता है कि फल आपको बाजार में न मिले, लेकिन यहां कुल्फी जरूर मिल जाए।

इस कुल्फी की कीमत 35 रुपये से शुरू होकर सौ रुपये से ऊपर तक जाती है। वैसे अब इस परिवार का मुख्य काम शादियों, पार्टियों और होटलों वगैरह में कुल्फी सप्लाई का है। दुकान तो सीताराम बाजार में अच्छे स्वाद की परंपरा निभा ही रही है।

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