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दो घाटियों की सुंदर सैरगाह: चिंदी

दो घाटियों की सुंदर सैरगाह: चिंदी

हिमाचल में कुल्लू-मनाली, डलहौजी, धर्मशाला शिमला आदि ऐसी बहुत से डेस्टेशन हैं, जिस ओर प्रकृति प्रेमी अक्सर रुख किया करते हैं। लेकिन चिंदी व कारसोग की खूबसूरती अभी भी छिपी हुई है। ये ऐसी दो घाटियां हैं, जो भले ही लोगों को याद न आती हों, मगर यहां बिताए गए वे सुकून के पल हमेशा हमारी यादों में कैद हो जाते हैं।

सेबों के लिए मशहूर चिंदी 6 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इन दिनों यहां जाना इसीलिए भी मनमोहक हो जाता है, क्योंकि चारों ओर फूल ही फूल नजर आते हैं। चिंदी की ओर जाने वाली सड़क कुछ संकरी है, हालांकि भीड़-भाड़ से दूर होने की वजह से यहां की कोई दिक्कत नहीं आती।

नालदेहरा से होते हुए आप सतलुत नदी के किनारे पार होते हुए करीब 32 किलोमीटर त्तता पानी पार करते हैं। यहां की खासियत यह है कि गर्म पानी के झरने हैं। यहां के ठंडे मौसम की सैर करते झरने में स्नान करना पर्यटकों को खूब भाता है। बस यहीं से आप के लिए एक के बाद एक देखने लायक स्पॉट्स की श्रृंखला शुरू हो जाती हैं। सबसे पहले आपकी नजर शिवजी की गुफा के बोर्ड पर नजर जाती है। गुफा की ओर बढ़ने के लिए आपको सिर्फ 2 किलोमीटर की ड्राइव और करनी होगी।

सन् 1986 में इस गुफा की खोज की गई थी। यहां शिवलिंग के साथ-साथ अन्य देवताओं को यहां प्रतीक रूप में स्थापित किया गया है। यहां से आपको आगे की ओर बढ़ने के लिए कुछ वापस आना होता है। अब सड़क पहाड़ी पर ऊपर की ओर निकलती है। लगभग 30 किलोमीटर के बाद धारमौर से करीब 1 किलोमीटर बाद मूलमहूनाग मंदिर जा पहुंचते हैं। यहीं से 10 किलोमीटर आगे मशहूर महुनाग मंदिर आता है। मुख्य मार्ग पर वापस लौटते वक्त चिंदी की दूरी यहां से सिर्फ 10 किलोमीटर रह जाती है। इसी गांव में चिंदी माता का मंदिर है। ट्रैकिंग के शौकीन यहीं से शिकारी देवी तक करीब 22 किलोमीटर की ट्रैकिंग का आनंद लेते हैं। यही वह स्पॉट भी है, जहां से कुल्लू और लाहौली की बर्फ से ढकी चोटियों का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि यही वह जगह है जहां दुर्लभ जड़ी-बूटियां मिल सकती हैं। और मंदिर के बारे में यहां तक कहना है कि मंदिर की देवी को यहां प्रकृति से मानवीय हस्तक्षेप पसंद नहीं है। और ऐसे कई उदाहरण देते हुए वे थकते भी नहीं हैं।

इस गांव से करीब 23 किलोमीटर दूर पंगाना है। यह स्थान यहां के राजाओं की राजधानी हुआ करती थी। यहां स्थित किला भी इसकी गवाही देता नजर आता है।

चिंदी से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कोरसोग घाटी। इस घाटी को अगर ध्यान से देखा जाए तो लगभग कटोरे जैसे दिखाई देती है। यहां स्थित भूतेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर के बारे में कहा जाता है कि पांडवों ने इसे अपने अज्ञातवास के समय बनवाया था। इस घाटी से करीब 5 किलोमीटर की दूरी के बाद काओ गांव है। यहां अगर देखना हो तो वास्तु कला व नक्काशी का सुंदर मेला देखा जा सकता है। नवरात्र में यहां आने का विशेष महत्त्व है।

पहुंचना भी नहीं है मुश्किल

शिमला व चिंदी के बीच की दूरी करीब 90 किलोमीटर है।

कहां ठहरें

ठहरने के लिए हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अच्छी व्यवस्था है। होटल बेहद खूबसूरत ढंग से सेब के बगीचे के बीचों बीच बना है।

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