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हौसलों से चीर डाला मुश्किलों के पहाड़ का सीना

हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, कुछ कर गुजरने का जज्बा और कड़ी मेहनत के बल पर इंसान अपने हर सपने को पूरा कर सकता है। इस बात का सबूत हैं आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले दिल्ली के दो होनहार।

आशीष भारती ने जहां देश की इस सबसे मुश्किल परीक्षा में 331 रैंक हासिल की और आईपीएस के लिए चयनित हुए, वहीं प्रवीण कुमार ने को 882 रैंक मिली है। उनका चयन इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के लिए हुआ है। प्रवीण के पिता पुराने सामान को ठीक करने का काम करते हैं। वहीं आशीष के पिता की मुखर्जी नगर में किताबों की दुकान है।

प्रवीण ने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों व आर्थिक तंगी के बावजूद उनके पिता ने हमेशा जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि कभी यह दबाव नहीं डाला कि आईएएस ही बनना है। पैसों की कमी और घर की जरूरतों के लिए 2003 में आशीष को पढ़ाई छोड़नी पड़ी और उन्होंने नौकरी कर ली। इसी बीच उनका चयन जेआरएफ के लिए हो गया और घर के हालात पटरी पर आ गए।

डीयू के राजनीति शास्त्र विभाग से एमफिल कर रहे प्रवीण कहते हैं कि उनका सपना ऐसे छात्रों की मदद करना है जो पैसों की कमी की वजह से मजबूर हैं। यदि मैं ऐसा कर सका तो समझूंगा जिंदगी का मकसद पूरा हो गया। उधर, पिता के साथ किताबों की दुकान पर बैठने वाले आशीष ने बताया कि मेरे पिता ने कई लोगों को आईएएस बनते देखा है। उनकी इच्छा थी कि मैं भी आईएएस बनूं। नेताजी सुभाष इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक करने वाले आशीष कहते हैं कि पिता ने मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी।
(दिल्ली संस्करण)

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