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जब ओसामा और अमाल का निकाह हुआ

सितंबर 1999 को राशद मोहम्मद सईद इस्माइल के पास उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण टेलीफोन आया। राशद उस वक्त यमन में एक धर्म प्रचारक और अल कायदा सदस्य की तरह काम कर रहा था। ओसामा बिन लादेन ने पांचवीं बार शादी करने का फैसला किया था और राशद को उनके लिए पत्नी ढूंढ़ने का काम सौंपा गया था।

राशद ने ध्यान से लादेन की बातें सुनीं। लादेन ने अपनी भावी पत्नी के जो गुण बतलाए थे, वे कुछ ऐसे थे- लड़की धार्मिक विचारों की कर्तव्यनिष्ठ, सुसंस्कृत व अच्छे परिवार की 16 से 18 वर्ष की होनी चाहिए। उसमें सहनशीलता होनी चाहिए, क्योंकि मेरी परिस्थितियां बेहद कठिन हैं।

खुशकिस्मती से राशद ऐसी ही एक लड़की को जानता था। राशद ने जो लड़की ढूंढ़ी, वह अमाल अहमद अल सादेह थी। राशद के एक पूर्व छात्र और सरकारी अफसर की बेटी थी अमाल। राशद के मुताबिक, ओसामा के लिए वह सबसे उपयुक्त दुल्हन थी। ओसामा की उम्र उस वक्त 44 वर्ष थी।

अब दस वर्ष बाद राशद इस बात के लिए संघर्ष कर रहा है कि अमाल और उनकी बेटी को वापस यमन लाया जा सके, जो ओसामा की मौत के बाद पाकिस्तान सरकार के कब्जे में है। राशद कहता है, ‘जब अमाल जैसी कोई महिला विधवा हो जाती है, तो यह सारे मुसलमानों का फर्ज है कि वे उसकी देखभाल करें और उनकी हिफाजत का इंतजाम करें। यमन की पूरी जनता उसे वापस लाना चाहती है।’ कुछ लोगों को फिक्र है कि अगर अमाल यमन आती हैं, तो राष्ट्रपति सालेह उन्हें पूछताछ के लिए अमेरिकियों को सौंप देंगे।

बहरहाल, वर्ष 2000 में राशद ने अमाल के सामने लादेन का प्रस्ताव रखा और बताया कि अमेरिकियों के दबाव की वजह से लादेन एक से दूसरी जगह भटकता है। जब अमाल ने लादेन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, तो पांच हजार डॉलर का मेहर अमाल के परिवार को दिया गया। उसके बाद शादी के पहले की रस्में निभाई गईं और दुल्हन को अफगानिस्तान भेजने की तैयारी की गई।

शादी कंधार में हुई, जिसमें शामिल होने वाले सभी पुरुष ही थे। कंधार तब तालिबान के कब्जे में था। सभी मर्द नाचते-गाते रहे और बिन लादेन के कदमों में एक भेड़ जिबह की गई और मेहमानों ने उस मौके के लिए लिखी गई कविताएं और गीत सुनाए।

यह बात अभी साफ नहीं है कि ओसामा के परिवार का क्या होगा? पाकिस्तान सरकार ने अमेरिकियों को उसकी पत्नियों से पूछताछ की इजाजत दे दी है। राशद मानता है कि लादेन के परिवार की सुरक्षा अल कायदा के लिए उतनी ही खास है, जितनी बिन लादेन की शहादत। वह कहता है, ‘हमने बिन लादेन की शहादत की खबर बहुत खुशी से सुनी, क्योंकि हम जानते थे कि अमेरिकियों के हाथ शहीद की मौत चाहते थे, पर उतनी ही महत्वपूर्ण हमारे लिए उनके परिवार की महिलाओं की इज्जत है।’

(ये लेखक के निजी विचार हैं)
द गाजिर्यन से..

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