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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी सुरक्षा के लिए लाखों की लागत से लगे दो अत्याधुनिक स्पीड गेट पीकदान बन गये हैं। जबकि दर्शनार्थियों के सामानों की जांच के लिए लायी गयी एक्स-रे मशीन महज शो पीस बनकर रह गयी है।

खास यह कि पांच साल बाद भी इसका उपयोग भी नहीं हो सका है। जनवरी 09 में पांच स्पीड गेट लगाने का प्रस्ताव पास हुआ। जुलाई माह तक गोदरेज कम्पनी के सहयोग से डेढ़ करोड़ की लागत से ढुंढीराज गणेश, छत्ताद्वार, सरस्वती फाटक, शनिदेव चैनल व नीलकंठ चैनल पर स्पीड गेट लगाए गए। प्रति गेट की कीमत 30 लाख है।

कम्पनी के इंजीनियर गौरव गुप्ता व प्रदीप गुप्ता के अलावा जापानी इंजीनियरों की मदद ली गयी थी। गेट की खासियत है कि एक से सात सेकेंड के अंदर सातो गेट एक स्थान से बटन दबाकर बंद हो जाते हैं।

आसपास के लोगों को एलर्ट करने के लिए सायरन भी बजता है। गेटों का संचालन कंट्रोल रूम से किया जाता है। अलग-अलग बंद करने के लिए हर गेट के पास बटन लगा है। परिसर के अंदर के तीन गेट तो ठीक हैं। मगर शनिदेव चैनल व ढुंढीराज गणेश पर लगे गेट के खम्भों व जमीन पर पान की पीक जमी रहती है। जिसे मौका मिला थूक कर निकल लेता है।

कम्पनी के इंजीनियर गौरव गुप्ता बताते हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। हालांकि गेट हार्डकोर लोहे से बना है फिर भी कुछ समय बाद खराबी आ सकती है। उधर, 18 लाख की लागत से वर्ष 05 में एक्स-रे मशीन मंगायी गयी। इसे छत्ताद्वार पर लगना था मगर प्रशासन को जगह नहीं मिल सका।

इस मशीन को कंट्रोल रूम के सामने टिन शेड में शो पीस की तरह रखा गया है। यहां एक सुरक्षाकर्मी की डय़ूटी लगती है। महज 50 फुट पहले छत्ताद्वार पर ही सुरक्षाकर्मी दर्शनार्थियों को चेक कर पेन तक निकाल लेते हैं। एएसपी ज्ञानवापी एके तिवारी ने भी बताया कि फिलहाल एक्स-रे मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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  • Web Title:स्पीड गेट बने पीकदान, एक्स-रे मशीन शो पीस