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जापान का भविष्य

जापान में इस वर्ष के बाल दिवस समारोह अब तक के सबसे फीके आयोजन रहे। हर वर्ष पांच मई को देश में बाल दिवस मनाया जाता है। जापान में लगातार 30वें साल बच्चों की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। आंतरिक मामले एवं संचार मंत्रालय ने विगत दो मई को जो रिपोर्ट जारी की, वह इस बात की तसदीक करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में 15 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या कुल आबादी की महज 13 प्रतिशत रह गई है। चार करोड़ से अधिक आबादी वाले 27 देशों में बच्चों की यह सबसे कम दर है।

देखने में यह दर शायद बहुत बुरी न लगे, क्योंकि ज्यादातर लोग यही चाहते हैं कि कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम रहे, ट्रेनों में भीड़ न हो और रहने के लिए अधिक बड़ी जगह मिले। और फिर जर्मनी, पोलैंड और इटली जैसे देश भी अपने यहां शिशु जन्म दर में गिरावट के कारण जनसंख्या ह्रास से जूझ रहे हैं। लेकिन मंत्रालय के अनुसार, जनसंख्या में यह गिरावट साल 2100 तक जापान की आबादी को छह करोड़ तक समेट सकती है। इसलिए इस पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

वैसे भी 65 या उससे अधिक उम्र के लोगों की 23 प्रतिशत आबादी के साथ जापान एक अलग तरह का देश बन रहा है। जनसंख्या के रूप में हो रहे इस परिवर्तन से उपजी चिंताएं ज्यादातर आर्थिक मसलों से जुड़ी हैं। जाहिर है, अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बनाए रखने के लिए एक नियत संख्या में कामगारों की जरूरत पड़ेगी ही और एक कुशल कामगार पर अधिक लोगों की निर्भरता अंतत: सामाजिक सेवाओं व कल्याणकारी कार्यो को ही प्रभावित करेगी।

बच्चे पैदा न करने की सोच कुछ हद तक दैनिक जिंदगी में बेहतरी से जुड़ी हुई है। अब जबकि देश ‘तोहोकु’ त्रासदी से उबर रहा है, तो यही वक्त है कि काम करने की जगहों, स्कूलों और अन्य क्षेत्रों में सुधार के नए व समुचित कदम उठाए जाएं। जब तक ये जिंदगी को अधिक आसान और अभिभावक बनने के रोमांचक एहसास के अनुकूल नहीं बनाते, तब तक जापान के भविष्य और इसके बाल दिवस पर प्रश्नचिह्न् लगे रहेंगे।           

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  • Web Title:जापान का भविष्य