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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जानें स्टार्ट-अप सक्सेस मंत्र

1 व्यवसाय योजना: सबसे पहले अपने बिजनेस विचार को मजबूत योजना का रूप दें। अपने विचारों को लिखें और उन्हें पूंजी की आवश्यकता, खर्चे, काम करने की पद्धति, मौजूदा मार्केट ट्रेंड, प्रमुख प्रतियोगी निवेशक और ग्राहक आदि के आधार पर बांट लें।            

2 आत्मविश्वास होना जरूरी: विशेषज्ञों की टीम शुरुआती स्तर पर किसी प्रोजेक्ट को सही दशा व दिशा दे सकती है। पर साथ ही छात्रों में अपने प्रोजेक्ट के प्रति संकल्प, अनुशासन और आत्मविश्वास का होना भी जरूरी है।

3 वित्त: पूंजी किसी भी बिजनेस की मूलभूत आवश्यकता है। स्टूडेंट स्टार्ट-अप को बैंक लोन मिलना मुश्किल होता है। अत: इस स्तर पर लक्ष्य के प्रति व्यावहारिक होना जरूरी होता है। यदि व्यवसाय विचार के स्तर पर है और विकास संभावनाएं स्पष्ट नहीं हैं तो एंजेल फाइनेंसिंग बेहतर विकल्प है, पर यदि व्यवसाय ने प्रारंभ में ही पकड़ बना ली है तो वेंचर कैपिटलिस्ट से संपर्क करें।

4 मार्केटिंग, बिक्री और शोध: स्टार्ट-अप असफल होने का मुख्य कारण स्टूडेंट्स का बाजार से जुड़े पहलुओं पर काम न करना है। प्रभावी मार्केटिंग रणनीति, गलती की गुंजाइश को कम कर देती है। उस क्षेत्र में पहले से कौन लोग काम कर रहे हैं, तकनीक का बाजार कितना बड़ा है, आदि पर ध्यान दें।

5 नेटवर्क को मजबूत बनाएं: फोकस्ड नेटवर्किग भावी संभावनाओं के द्वार खोलती है। छोटी-सी बातचीत बड़ी बिजनेस डील बन सकती है। अपना बिजनेस कार्ड साथ रखें। ।

स्टार्ट-अप शब्दावली

वेंचर कैपिटल: कंपनी खोलने के लिए लगाई जानी वाली शुरुआती पूंजी। स्टार्ट-अप में सफलता की गारंटी नहीं होती, इसलिए मुनाफे की संभावनाओं के साथ जोखिम की आशंका भी जुड़ी होती है। वेंचर कैपिटल उन कंपनियों के लिए खास उपयोगी है, जिन्हें बाजार में मौजूद अन्य स्रोत जैसे बैंक लोन आदि से पूंजी एकत्र करने में परेशानी होती है। यह पूंजी कंपनी में इक्विटी के रूप में प्रवेश करती है।

सीड कैपिटल: बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक पूंजी। आमतौर पर यह पूंजी कंपनी के संस्थापक अपनी निजी संपत्ति से या मित्र व परिवार से हासिल करते हैं। यह राशि अपेक्षाकृत कम होती है। बिजनेस विचार स्तर पर होने के कारण इस पूंजी का इस्तेमाल रिसर्च और डेवलपमेंट में होता है। इस पूंजी का निवेश प्रमोटर के प्रोजेक्ट के प्रति समर्पण को दिखाता है।

वेंचर कैपिटलिस्ट (वीसी): वीसी से आशय ऐसे व्यक्ति और निवेश फर्म से है, जो किसी व्यवसाय में मुनाफे की अपेक्षा से पूंजी का निवेश करते हैं। आमतौर पर वीसी पूंजी के साथ प्रबंधकीय और तकनीकी विशेषज्ञता भी लाते हैं। अमूमन वीसी फर्म तकनीकी विशेषज्ञता, बिजनेस ट्रेनिंग रखने वाले लोगों की छोटी टीम होती है, जो अच्छा व्यावसायिक रिटर्न देने वाले तकनीकी व्यवसायों की पहचान में माहिर होती है।

एंजेल इन्वेस्टर (एआई): इन्हें बिजनेस एंजेल और अनौपचारिक निवेशक भी कहा जाता है। ये इक्विटी या परिवर्तनीय ऋण के बदले बिजनेस स्टार्ट-अप को पूंजी प्रदान करते हैं। इन दिनों छोटी एंजेल कंपनियां एंजेल ग्रुप्स के तौर पर काम कर रही हैं। 

एआई और वीसी में अंतर: हालांकि दोनों का मूलभूत काम रिटर्न की अपेक्षा से मुनाफे के सौदों में निवेश करना है, पर इन दोनों में कुछ अंतर है। जहां एंजेल ज्यादातर अपना फंड निवेश करते हैं, वहीं वीसी पेशेवराना तरीके से दूसरों से एकत्रित राशि का निवेश करते हैं। एंजेल आमतौर पर अमीर और सफल उद्यमी या उनका ग्रुप होता है, वहीं वीसी, कॉरपोरेट ईकाइयां होती हैं, जो निवेशकों और विभिन्न संस्थाओं से पैसा एकत्रित कर निवेश करती हैं। एंजेल छोटे स्तर पर निवेश करते हैं, वहीं वेंचर कैपिटल फर्मो का आकार बड़ा होता है। एंजेल पूंजी के बाद बिजनेस में बढ़ोतरी होने पर वेंचर कैपिटल फर्मो द्वारा भी निवेश किया जा सकता है।                     

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