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फिर टूटे यूपीसीए के मानक

कूच बिहार और वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए कमला क्लब में चल रहे अंडर-19 क्रिकेट ट्रायल में एक बार फिर यूपीसीए अपने मानकों की रक्षा नहीं कर पाया। कई मंडलों से खिलाड़ियों की संख्या निर्धारित नियम से ज्यादा रही।

इससे एक बार फिर चयनकर्ताओं को यूपी टीम बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि यूपीसीए निदेशक ज्योति बाजपेई ने भविष्य में मंडलों से आने वाली जम्बो सूची का कद घटने की उम्मीद जताई है।

दो वर्ष पूर्व यूपीसीए ने हर मंडल से ट्रायल में 50 से ज्यादा खिलाड़ी ना लेने की घोषणा की थी लेकिन सीजन के पहले ही ट्रायल में मेरठ मंडल से 98, कानपुर से 79 और लखनऊ से 67 खिलाड़ी उतरे। इसके अलावा वाराणसी ने भी 51 खिलाड़ी भेज कर इस मानक को तोड़ा। बरेली ने 49, अलीगढ़ और आगरा ने 43-43, इलाहाबाद ने 42, फैजाबाद ने 36, झाँसी ने 34 और गोरखपुर मंडल ने 33 खिलाड़ी भेजे। इन सूचियों के अलावा बड़ी संख्या में सिफारिशी और मेडिकल सर्टिफिकेट वाले खिलाड़ी भी बैक डोर से भी घुसे।

केसीए चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने भीड़ बढ़ने के पीछे कानपुर मंडल में ज्यादा टैलेंट होने का तर्क दिया। उन्होंने कहा कि यहाँ इतना टैलेंट है कि किसी खिलाड़ी को मना करना मुश्किल है। यूपीसीए निदेशक ज्योति बाजपेई ने कहा कि हम स्टेट ट्रायल में खिलाड़ियों की संख्या कम रखने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि अब भी बड़ी तादात में खिलाड़ी आ रहे हैं। हम भविष्य में क्रीम टैलेंट को ही स्टेट ट्रायल में उतारने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि यूपीसीए ने इस मामले में ज्यादा सख्त रवैया इसलिए नहीं अपनाया, ताकि एक भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी छूट न सके। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे खिलाड़ियों से भी संख्या बढ़ जाती है, जो बीमारी की वजह से मंडल ट्रायल में सम्मिलित नहीं हो पाते हैं। फिर भी हम ऐसे खिलाड़ियों को मेडिकल सर्टिफिकेट देखने के बाद ही ट्रायल में भाग लेने की अनुमति प्रदान करते हैं।

यूपीसीए निदेशक ने कहा कि हमने ट्रायल के बाद सलेक्शन मुकाबले इसीलिए रखे हैं, ताकि यदि कोई खिलाड़ी 60 की सूची तक किसी सिफारिश से पहुँच भी गया हो तब भी 45 या 30 खिलाड़ियों में उसी टैलेंट को जगह मिले, जो सलेक्शन मैचों में बढ़िया खेला हो। इस बीच ट्रायल के तीसरे दिन सिर्फ 200 खिलाड़ी मैदान में बचे।

शुक्रवार को सुबह दूसरे राउंड में कुछ खिलाड़ियों का ट्रायल और होने के बाद फाइनल राउंड शुरू हो जाएगा। पिछले सीजन में कैम्प करने वाले कुछ खिलाड़ियों के सुबह देर से पहुँचने पर चयन समिति ने उनके कस बल ढीले करने के लिए मैदान पर एक घंटे तक दौड़ लगाने की सजा दी।

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