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मिलने लगे सीपीएमटी के प्रवेश पत्र, रफ्तार धीमी

‘सीपीएमटी 2011’ की 25 को होने वाली परीक्षा के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने प्रवेश पत्र भेजने शुरू कर दिए हैं लेकिन रफ्तार बेहद धीमी है। नेट से डाउनलोड डुप्लीकेट प्रवेश पत्र के बारे में अधिकृत रूप से कोई नई घोषणा नहीं की गई है। पहली बार प्रवेश पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि सॉल्वर अगर परीक्षा देते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई होगी।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को सीपीएमटी का जिम्मा तो दिया गया है लेकिन तकनीकी दृष्टि से अपडेट न होने के कारण यह विश्वविद्यालय छात्रों को परीक्षा के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं दे पाया है। सबसे बड़ा मुद्दा डुप्लीकेट प्रवेश पत्र का है, जो प्रॉस्पेक्टस की जानकारी के हिसाब से छात्र के स्वयं झांसी पहुंचने पर मिल सकेगा। कुलसचिव ने इसमें छूट देते हुए कहा था कि नेट से डाउनलोड करने वाले प्रवेश पत्र मान्य होंगे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने अब तक अपनी वेबसाइट पर इसकी अधिकृत घोषणा नहीं की है।

वेबसाइट पर सीपीएमटी लिंक अलग से नहीं है। छात्र इस बात को लेकर भ्रम में हैं कि वेबसाइट पर जो जानकारी फॉर्मो की स्वीकृति को लेकर है, वह केवल फॉर्म पहुंचने की है या स्वीकृत होने के बाद परीक्षा के लिए मान्य ठहराने की है। यह लिस्ट तब अपलोड की गई थी, जब फॉर्म न पहुंचने को लेकर कानपुर समेत कुछ अन्य जनपदों में विवाद शुरू हुआ था। 65 हजार से अधिक फॉर्म विवि पहुंचे थे।

कानपुर में पहले चरण में औसतन 70 प्रवेश पत्र रजिस्टर्ड डाक से आए हैं। प्रवेश पत्र में ही इस बात का उल्लेख कर दिया गया है कि अगर कोई किसी के स्थान पर परीक्षा देते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 468 और 471 के तहत कार्रवाई होगी। परीक्षा में निगेटिव मार्किग नहीं होगी। छात्रों को बॉल प्वाइंट (ब्लैक या ब्ल्यू) पेन से ऑनसर के गोले कलर करने होंगे। ऑनसर शीट की तीसरी कॉर्बन कॉपी छात्र को दे दी जाएगी। छात्र परीक्षा में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे डिजिटल डायरी, कैलकुलेटर, लॉग शीट आदि को अनफेयर मींस में माना जाएगा।

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