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टेंडर खुलने पर ठेकेदारों का हंगामा, अफसर सहमे

अम्बेडकर गाँवों को सजाने और संवारने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की ओर से जारी किए गए करोड़ों के टेंडर बुधवार को संगीनों के साये में सीलयुक्त बाक्स में डाले गए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम आशंकाओं के बीच डाले गए टेंडरों के दौरान कलेक्ट्रेट और विकास भवन परिसर कड़े सुरक्षा कवच में जकड़ा रहा। दोपहर एक बजे कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में टेंडर खुलने के दौरान काम न मिलने पर कई ठेकेदारों ने एक घंटे तक हंगामा भी काटा।

हंगामे की सूचना पाकर मौके पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों ने दबंगई कर रहे ठेकेदारों को धकियाकर बाहर किया। आरईएस के अधिशासी अभियंता एमएम हुमायूं शाह ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। उन्होंने बताया कि सम्पूर्ण टेंडर प्रक्रिया सकुशल निपट गई।
 
करीब एक पखवारे से ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के करोड़ों के टेंडरों को लेकर चल रही रस्साकशी और अटकलों पर बुधवार को विराम लग गया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को टेंडर डालने और खोले जाने का कार्यक्रम निर्धारित था। गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए विकास भवन में स्थित आरईएस दफ्तर से लेकर पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को कड़े सुरक्षा घेरे में सुबह से ही जकड़ दिया गया। कलेक्ट्रेट के सभी गेटों पर वाहनों और समूह के साथ प्रवेश प्रतिबंधित था। इसके अलावा दोपहिया वाहनों को भी जामा तलाशी के बाद अंदर जाने की इजाजत दी गई। चौतरफा चले सुरक्षा घेरे के चलते विकास भवन तक पहुँचे दबंग ठेकेदारों की मंशा पर प्रशासन की सख्ती ने पानी फेर दिया था। सुबह करीब 10 बजे पुलिस अफसरों की निगरानी में टेंडर डालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

आरईएस के जिस कक्ष में टेंडर बाक्स रखे गए थे वहाँ सिर्फ एक ही ठेकेदार को भीतर जाने की इजाजत दी गई थी। ओपेन टेंडर प्रक्रिया के तहत आरईएस ने पहले से ही नियम निर्देशों की सूचना चस्पा कर दी थी। पुलिस के कड़े पहरे के बीच लगभग एक बजे तक टेंडर डाले गए उसके बाद कोतवाल नगर राजेश सिंह अपनी अभिरक्षा में टेंडर बाक्सों को लेकर कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में पहुँचे। इसके बाद ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग की ओर से टेंडर खोले जाने की प्रक्रिया का आगाज हुआ। विभाग के अधिकारी 60 करोड़ रुपए के 318 कामों के लिए 278 टेंडर निकाले गए थे। अधिशासी अभियंता ने बताया कि टेंडर खरीद के दौरान 990 टेंडरों की खरीद हुई। उन्होंने बताया कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत सभी टेंडर डाले गए और खोले गए।

उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में दबाव और अनियमितता के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इसी दौरान कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जब आरईएस के टेंडर खोले जा रहे थे तब काम न मिलने से खफा कई ठेकेदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। बताया जाता है कि इन ठेकेदारों ने हंगामा करते हुए अफसरों को धमकाना शुरू किया और आरोप लगाया कि टेंडर दिए जाने में सत्ताधारी दल के नेताओं ने दुरुपयोग किया है। बुधवार सुबह से लेकर देर शाम तक चले आरईएस के करोड़ों के टेंडरों को लेकर ठेकेदार अलग-अलग गुटों में बटे दिखाई दिए।

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