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घायलों को इलाज तक नसीब नहीं

भट्टा पारसौल गांव में सात मई की पुलिसिया कार्रवाई में घायल हुए लोगों को दवा तक नसीब नहीं हो पा रही है। गांव का दौरा करने वाले एक जांच दल ने यह दावा किया है।

जांच दल के सदस्य एनके भट्टाचार्य ने बताया कि जब वे गांव पहुंचे तो चार-पांच हजार की आबादी वाले गांव में सिर्फ चार या पांच पुरुष ही दिखे। इनमें एक वृद्ध व्यक्ति के हाथ में गोली लगी हुई थी, लेकिन उसका इलाज नहीं हो पा रहा था। क्योंकि वहां दवा की सारी दुकानें बंद हैं और गांव में कोई पुरुष नहीं है जिसके साथ वह बाहर जाकर इलाज करा सकें।

उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने इलाज के नाम पर अपने हाथों पर नीम की पत्त्तियां पीसकर लगा रखी थीं। भट्टाचार्य ने दावा किया कि प्रशासन गांव वालों को अब भी गांव से बाहर नहीं निकलने दे रहा है और न ही बाहर के लोगों को गांव में प्रवेश करने दिया जा रहा है। जांच दल के ही एक अन्य सदस्य ने कहा कि उम्मीद है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले का स्वत: संज्ञान लेगा क्योंकि वह सक्षम है और उसके पास जांच के साधन भी उपलब्ध हैं।

सात मई को भटटा पारसौल गांव में पुलिस और किसानों के बीच गोलीबारी में दो पुलिसकर्मियों और तीन किसानों की मौत हो गयी थी।

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