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सलाह से ज्यादा कमाते हैं प्रोफेसर

देश के सर्वोच्च प्रबंधन, इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में प्रोफेसरों की कमाई को पंख लग गए हैं। इन संस्थानों में कार्य करने वाले प्रोफेसर महज आठ-दस साल की सेवा में वेतन से ज्यादा बाहरी कमाई कर लेते हैं। 

यहां बाहरी कमाई से अर्थ एग्जीक्यूटिव ट्रेनिंग, कंसल्टेंसी, प्रोजेक्ट और प्रोडक्ट के सत्यापन तथा शोध कार्य से होने वाली निजी कमाई है। जिसका करीब 90 प्रतिशत प्रोफेसरों की जेब में जाता है, बाकी दस प्रतिशत ही सरकारी खजाने में जमा होता है।

सबसे ज्यादा कमाई आईआईएम के प्रोफेसरों की है। इसका खुलासा आईआईएम कोलकाता के चेयरमैन डॉ. अजित बालकृष्णन की अध्यक्षता में बनी एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट से हुआ। कमेटी में आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक समीर बरुआ, त्रिचि के चेयरमैन एम. दामोदरन, रोहतक के चेयरमैन रविकांत भी शामिल थे।

उन्होंने प्रोफेसरों की जवाबदेही तय करने पर अपने सुझाव देते हुए कहा कि उनकी कुल कमाई कम नहीं है। आईआईएम में महज आठ-दस साल की सेवा के बाद प्रोफेसरों को कंसल्टेंसी और एग्जीक्यूटिव ट्रेनिंग का इतना काम मिल जाता है, जिससे वे साल में बीस लाख रुपये अतिरिक्त कमा लेते हैं।

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