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कारखाने से निकलने वाला चारकोल बना बड़ी समस्या

राज्य के 47 स्पॉंज आयरन कारखानों पर प्रदूषण पर्षद का सिकंजा कसेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (सीपीसीबी) इन कारखानों से प्रदूषण कम करने के लिए गाईडलाइन तैयार करने में लग गया है। 10 मई को नई दिल्ली में सीपीसीबी के चेयरमैन डॉ एसपी गौतम की अघ्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि अभी से इस पर काम शुरू नहीं किया गया तो आनेवाले समय में यह बड़ी समस्या के रूप में उभरेगा। बैठक में ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश समेत झारखंड के अधिकारी उपस्थित थे। बताया गया कि अकेले रायपुर शहर में स्पांज आयरन के 47 कारखाना हैं।


जबकि पूरे झारखंड में 47  स्पांज आयरने के कारखाने हैं। इसके बाद भी झारखंड में उन जिलों में प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है, जहां कारखाने हैं। बैठक में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव संजय कुमार सिन्हा ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

सीपीसीबी के गाईडलाइन--
स्पॉंज आयरने के कारखाने से निकलनेवाले चारकोल का निष्पादन करें
चारकोल के निष्पादन के लिए ठोस योजना बनाई जाए
सिर्फ डंपिग समस्या का समाधान नहीं होगा
चारकोल का उपयोग कैसे किया जाए इस पर एक्शन प्लान बनाएं
चारकोल का उपयोग बिजली बनानेवाले प्लांट में किया जा सकता है।
चारकोल का उपयोग नहीं होने से इसके धूलकण से प्रदूषण बढ़ेगा।

झारखंड का एक्शन प्लान -
स्पॉंज आयरन कारखाना से प्रदूषण नियंत्रण के सवाल पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद का एक्शन प्लान पहले ही बन चुका है और इस पर काम भी हो रहा है। प्रदूषण पर्षद के सदस्य सचिव संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि सभी कारखानों को ऑन लाइन करने की योजना है। ताकि कारखाने से होनेवाले प्रदूषण का पता लगाया जा सके।

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