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सहकारी बैंकों में बहाली को बनेगी नीति

सहकारी बैंकों में बहाली के लिए अलग से कार्मिक नीति बनेगी। कामकाज पर नजर रखने के लिए हर बैंक में एक चीफ एस्क्यूटिव अफसर की बहाली होगी। इसी के साथ भर्ती बोर्डो की परीक्षा से सहकारी बैंकों के रिक्त पदों को भरने का मामला टल गया।

बैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बैंकों की बहाली से अपना हाथ खींच लिया। सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने बहाली की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के लिए बैंकों को स्वतंत्र कर दिया। साथ ही यह संदेश भी दे दिया कि सरकार बहाली में हस्तक्षेप तो नहीं करेगी, लेकिन कर्मियों की गुणवत्ता से समझौता भी नहीं करेगी।

राज्य में पहली बार सहकारिता विभाग के अधिकारियों और बैंकों के चेयरमैन व एमडी आमने-सामने हुए तो बैंकिंग सेक्टर के विकास में कर्मियों और वाहन की कमी बड़ी बाधा के रूप में सामने आ गई। सहकारी बैंको में लगभग 11 हजार पदों को जल्द भरने के लिए कई तरह के सुझाव सामने आये। लेकिन इसके लिए अलग से कार्मिक नीति बनाने पर सरकार और बैंक दोनों के अधिकारी सहमत हो गये। अब गुजरात और राजस्थान में बहाली की प्रक्रिया का अध्ययन कर राज्य के सहकारी बैंक अपनी पारदर्शी नीति तैयार करेंगे। इसके लिए अधिकारियों के दो दल दोनों राज्यों में भेजे जाएंगे।

रिपोर्ट का अध्ययन कर राज्य के लिए नीति तैयार करने की जिम्मेवारी स्टेट कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन को दी गई है। वह सभी जिला सहकारी बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठकर कार्मिक नीति का प्रारूप तैयार करेंगे।
 
बैठक में हुए फैसले के अनुसार स्टेट कोआपरेटिव बैंक अपने लाभ से वाहन खरीद कर सभी सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंकों को देगा। चूंकि स्टेट कोआपरेटिव बैंकों में सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंकों का पैसा लगा है लिहाजा वाहन उन्हें लाभांश के रूप में मिलेगा।

राज्य सहकारी बैंक की संख्या - 1
जिला सहकारी बैंकों की संख्या - 23
सहकारी बैंकों की कुल शाखाएं - 236
रिक्तयों की संख्या - लगभग 11 हजार

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