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पूर्व कुलसचिव की फेशियल सिग्नेचर वाली मार्क्सशीट पर लगी रोक

सीएसजेएम विश्वविद्यालय में कुलसचिव विवाद के कारण डुप्लीकेट मार्क्सशीट बनने का काम पिछले डेढ़ महीने से ठप पड़ा है। छात्र भटक रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय कोई विकल्प नहीं तलाश पाया है। नया फार्मेट जारी होने तक डुप्लीकेट मार्क्सशीट नहीं मिल पाएंगी। विवि में प्रवेश के लिए तब तक नेट से डाउन लोड डुप्लीकेट मार्क्सशीट मान्य होगी।

कुलपति प्रो. हर्ष कुमार सहगल और कुलसचिव महेश चंद्र के बीच विवि परीक्षा की तैयारी के समय से विवाद चल रहा था। कुलपति के खिलाफ एक पत्र लिखना कुलसचिव को महंगा पड़ा और उनका तबादला संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय कर दिया गया। इसके बावजूद कुलसचिव ने जब ज्वाइन नहीं किया और सीएसजेएम से रिलीव भी नहीं हुए।

शासन ने कोर्ट का आदेश आते ही मंगलवार को उन्हें निलंबित कर दिया। चूंकि वे रिलीव भी नहीं किए गए थे और प्रकरण कोर्ट में पेंडिंग चल रहा था, लिहाजा उनके हस्ताक्षर वाली डुप्लीकेट मार्क्सशीट रिलीज करने पर रोक लगा दी गई थी। इन डुप्लीकेट मार्क्सशीट पर फेशियल सिग्नेचर कुलसचिव महेश चंद्रा के थे, जिसे ट्रांसफर के बाद मान्य नहीं माना जा सकता।

विवाद की शुरुआत में डुप्लीकेट मार्क्सशीट तो बनती रहीं लेकिन बाद में रोक लगा दी गई। जो भी अभ्यर्थी मार्क्सशीट बनवाने आ रहे हैं, उन्हें या तो लौटाया जा रहा है और या फिर उनके डाक्यूमेंट्स जमा करा लिए जा रहे हैं। इनसे समय-समय पर जानकारी लेने के लिए कहा गया है। कन्नौज से आए छात्र अभिजीत ने बताया कि उसकी नौकरी लग गई है।

मार्क्सशीट संशोधित होने के बाद लेने आए थे लेकिन नहीं बन पा रही है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी पीयूष सक्सेना का कहना है कि विवि के पास जो मार्क्सशीट हैं, उस पर फेशियल हस्ताक्षर पूर्व कुलसचिव के हैं, वह अब मान्य नहीं हैं। ऐसे में नए फॉर्मेट वाले हस्ताक्षर की मार्क्सशीट आने के बाद ही मिल सकेंगी। तब तक प्रवेश के लिए नेट से डाउनलोड मार्क्सशीट को उपयोग में लाया जा सकता है।

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