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कारगर हो सकता है हरियाणा का मॉडल

हरियाणा ने भूमि अधिग्रहण के लिए वार्षिक भत्ता सह मुआवजा नीति का अनुसरण किया है। इसके तहत किसानों को न सिर्फ बाजार मूल्य के अनुसार जमीन की कीमत दी जाएगी, बल्कि एक निश्चित समय के लिए वार्षिक भत्ता भी दिया जाएगा। भूपिंदर सिंह हुड्डा सरकार ने जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को प्रति एकड़ आठ लाख से 20 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

जमीन का मूल्य निर्धारण इलाके के हिसाब से किया जाएगा। इसके अलावा किसानों को 33 साल के लिए प्रति एकड़ 15,000 रुपए का वार्षिक भत्ता भी दिया जाएगा, जिसमें हर साल प्रति एकड़ 500 रुपए की वृद्धि की जाएगी।

साथ ही, हरियाणा सरकार की एजेंसियां- हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हूडा) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) उन किसानों को आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट भी देंगे, जिनकी जमीन अधिगृहीत की जाएगी। प्रभावित किसानों को पुन: रोजगार और आजीविका के लिए 350 (अधिकतम) वर्ग गज के आवासीय प्लॉट और 2.75 गुणा 2.75 मीटर के कॉमर्शियल बूथ मुहैया कराए जाएंगे।

वहीं हरियाणा की ही तरह कृषि प्रधान उसके पड़ोसी राज्य पंजाब ने भी किसानों को जमीन अधिग्रहण के लिए बड़ी मुआवजा राशि देने की घोषणा की। मोहाली में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और एयरोसिटी के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1.5 करोड़ रुपए मुआवजे का एलान किया गया है। वैसे गुजरात में भी जमीन अधिग्रहण की नीति काफी बेहतर है।

मायावती की अधिग्रहण नीति
3 सितंबर 2010 को घोषित भूमि अधिग्रहण नीति के मुताबिक, प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपए का वार्षिक भत्ता 33 साल के लिए। वार्षिक भत्ता में हर साल 600 रुपए की वृद्धि। जो किसान वार्षिक भत्ता नहीं चाहते हैं, उनको प्रति हेक्टेयर 2.4 लाख रुपए का एकमुश्त मुआवजा।

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