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पुरुलिया कांड के राज से पर्दा उठने का अर्थ

केंद्रीय गृह मंत्री पिछले दिनों जब पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए उतरे, तो उन्होंने गरजकर कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘देश भर का सबसे खराब शासन’ है और माकपा ने इसे कत्लगाह बना दिया है। बहरहाल, उनकी इस गर्जना से उठी धूल बैठी भी नहीं थी कि किम डेवी के रहस्योद्घाटन सामने आ गए। यह वही किम डेवी है, जिसे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में विमान से घातक हथियार गिराए जाने की घटना का मुख्य सूत्रधार माना जाता है।

वर्ष1995 की 17-18 दिसंबर की मध्य रात्रि में पुरुलिया में आनंद मार्ग के मुख्यालय के पास एक हवाई जहाज से भारी मात्र में घातक हथियार गिराए गए थे। आगे चलकर इस मामले की सुनवाई कर रहे कोलकाता के विशेष सत्र न्यायालय को सीबीआई ने बताया कि जो 500 ए के-47 राइफलें गिराई गई थीं, उनमें से सिर्फ 87 ही बरामद हो सकीं और 15 लाख चक्र गोलियों तथा अन्य घातक हथियारों में से बहुत छोटे-से हिस्से को ही जब्त किया जा सका था।

उस समय तो आम तौर पर यही माना जा रहा था कि वे हथियार आनंद मार्गियों के लिए थे, ताकि वे पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट विरोधी हिंसा का अपना खेल तेज कर सके। लेकिन अब किम डेवी ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन नरसिंह राव सरकार ने यह सब होने दिया था, ताकि पश्चिम बंगाल की सरकार को अस्थिर किया जा सके।

अगर यह सही है, तो इसका अर्थ यह निकलता है कि केंद्र सरकार ने खुद ही देश की सुरक्षा में गंभीर सेंध लगाने और हमारी सीमाओं के अंदर इस तरह अवैध तरीके से हथियार गिराए जाने की इजाजत दी थी। केंद्र सरकार का ऐसा करना एक तरह से हमारे संविधान के आधार स्तंभों पर ही आघात है।

यह बहुत ही गंभीर मामला है कि अपनेराजनीतिक स्वार्थ पूरे करने के लिए कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में केंद्र सरकार  उस संविधान के साथ भीतरघात करने के लिए तैयार हो गई थी, जिसकी शपथ लेकर वह सत्ता में आई थी।

इससे भी बदतर यह कि हथियार गिराने के बाद जब उक्त विमान को पकड़ लिया गया और उसे मुंबई में उतरने पर मजबूर भी कर दिया गया, तब भी किम डेवी को वहां से आराम से निकल जाने दिया गया। हां, उसके साझीदार पीटर ब्लीच तथा विमान के छह सदस्यीय लाटवियाई चालक दल को जरूर जेल में बंद किया गया था। आगे चलकर चालक दल को तो छोड़ दिया गया, पर पीटर ब्लीच पर बाकायदा मुकदमा चलाया गया और अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई।

लेकिन बहुत ही विचित्र तथा समझ में न आने वाले तरीके से भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान के जरिये पीटर ब्लीच को भी छुड़वा दिया था। इसलिए अब यह जरूरी है कि डेवी का प्रत्यर्पण हो और मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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