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विज्ञान कथा और सत्यजित रे

साहित्य और सिनेमा की अविस्मरणीय विभूति सत्यजित रे की रुचि आरंभ से ही चित्रकला में थी, मगर 1950 में लंदन प्रवास के दौरान उनकी रुचि फिल्मों में विशेष रूप से बढ़ी, और बाइसिकल थीव्स फिल्म ने उन पर ऐसा प्रभाव डाला कि उन्होंने फिल्म निर्माण को ही अपना कार्यक्षेत्र बना लिया।

उनके रूप में देश को एक अद्भुत लेखक, निर्देशक और चित्रकार मिला, मगर उनका एक और योगदान, जो काफी अहम है, वह है विज्ञान लेखन के क्षेत्र में। संभवत: इसके पीछे उनके पितामह स्व़ उपेंद्र किशोर राय के संस्कारों की भूमिका रही होगी, जो ब्रह्मा समाज के नेता के साथ-साथ एक खगोलविद् भी थे।

विज्ञान कथाओं में सत्यजित रे की बांकूबाबुर बंधू (या बांकू बाबू का मित्र) शीर्षक कहानी का उल्लेखनीय स्थान है। 1962 में लिखी गई इस कहानी की खासियत है, एक दूसरे ग्रह के जीव की उपस्थिति, जो स्वभाव से काफी दयालु और बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है।

पूर्ववर्ती विज्ञान कथाओं के एलियंस की तरह यह खौफनाक या आक्रामक नहीं है। सत्यजित बाबू की इस रचना ने देश-विदेश के कई व्यक्तित्वों को आकर्षित किया। स्टीवेन स्पीलबर्ग की क्लोज एनकाउन्टर ऑफ द थर्ड काइंड तथा राकेश रोशन की कोई मिल गया जैसी फिल्में तथा कई टीवी धारावाहिक इस रचना से प्रेरित माने जाते हैं। विज्ञान लेखन को रोचक बनाने की दिशा में एक साहित्यकार तथा फिल्मकार के रूप में सत्यजित रे जैसी हस्तियों ने जो बुनियाद रखी, आज उसे और भी मजबूत करने की जरूरत है।                      

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  • Web Title:विज्ञान कथा और सत्यजित रे