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केन्द्र सरकार विकास में रोड़े न अटकाये: निशंक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को केन्द्र सरकार पर उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास में रोड़े अटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिमालयी राज्य उत्तराखंड के विकास के लिये पूर्वोत्तर राज्यों की तरह से 90 और 10 फीसदी के अनुपात में राशि मिलनी चाहिए।

निशंक ने आज यहां अपनी अंत्योदय यात्रा के द्वितीय चरण के बाद कहा कि उनकी इस यात्रा में उमड़ रही भारी भीड़ से अब राज्य के विपक्षी नेता बौखला गये हैं और इसीलिये उनकी सरकार पर अनाप शनाप आरोप लगाये जा रहे हैं। स्थिति तो यह है कि केन्द्र से पैसा आता नहीं है और विपक्षी आरोप लगाना शुरू कर देते हैं कि उसका घपला हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है लेकिन यहां विकास योजनाओं में 90 प्रतिशत अनुदान तथा शेष दस प्रतिशत ऋण देने के नियमों का पालन नहीं कर अन्य राज्यों की तरह 70 और 30 प्रतिशत वाला नियम लगाया जा रहा है। यह इस राज्य के साथ सरासर अन्याय है और इसके चलते इस राज्य को उसके न्यायोचित अधिकार से वंचित रखा गया है तथा इससे अब तक नवोदित राज्य को 2400 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

निशंक ने कहा कि उनकी सरकार की बेहतर कार्यशैली के चलते ही केन्द्रीय योजना आयोग ने चालू वर्ष 2011-12 के लिये 7800 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृति दी है और तो और 667 करोड़ रुपए की विशेष सहायता भी घोषित की है।

मुख्यमंत्री निशंक ने कहा कि केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड का हक मार कर विशेष राज्य के दर्जे को पूर्ण रूप से नहीं बल्कि आंशिक रूप से लागू कर रखा है। इसी तरह प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में वन क्षेत्र में जितनी जमीन को लिये जाने की आवश्यकता पड़ती है उससे दुगुनी जमीन की अन्यत्र से मांग की जाती है। मैं पूछना चाहता हूं कि जिस राज्य में 70 प्रतिशत जंगल है वहां शेष 30 प्रतिशत में से कहां से जमीन निकाल कर दी जाये।

उन्होंने कहा कि यह घुमाफिरा कर यहां के विकास को रोकने का कुत्सित प्रयास है। मैं यह साफ-साफ कहना चाहता हूं कि वन विभाग के नाम पर किसी भी जमीन के हस्तांतरण का नियम कम से कम इस राज्य के लिये तो नहीं हो क्योंकि यहां तो राष्ट्रीय मानक से अधिक जंगल है जिसके माध्यम से पूरे देश और दुनियां को आक्सीजन दिया जा रहा है।

निशंक ने कहा कि प्रतिवर्ष करीब दस हजार करोड़ रुपए का आक्सीजन इस राज्य द्वारा दिया जा रहा है और इसलिए कम से कम एक हजार करोड़ रुपए ग्रीन बोनस के रूप में इस राज्य की वन संपदा को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिये केन्द्र सरकार को देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक सड़क की योजना को स्वीकृत करने में इतनी देर लगा दी जाती है कि तब तक उसकी लागत राशि ही बढ़ जाती है और फिर बढी हुई राशि राज्य से वसूली जाती है। इस तरह से विकास की योजनाओं में रोडा अटकाया जाता है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड को वर्ष 2013 तक के लिये विशेष औद्योगिक पैकेज दिया था लेकिन इसकी समय सीमा को कम कर दिया गया। मैं यह मांग करता हूं कि इसे कम से कम 2023 तक बढ़ाया जाये।

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