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गेहूं से भी हो सकती है एलर्जी

गेहूं से भी हो सकती है एलर्जी

हम घरों, होटलों और रेस्तरां में गेहूं के आटे से बनी पूड़ियां, कचौड़ियां, बर्गर, पित्जा, केक, पेस्ट्री और न जाने कितने ही फूड आइटम्स का लुत्फ उठाते हैं, मगर क्या आपको पता है कि कभी यह आपके लिए मुसीबत भी बन सकते हैं। नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग पेट की समस्याओं से ज्यादा घिरे रहते हैं, उनको गेहूं से बने आइटम्स नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ज्यादा दिनों तक अगर पेट की समस्या का इलाज नहीं हो तो स्थिति पेट में होने वाले ग्रंथि कैंसर (एडेनोकासिनोमा) तक पहुंच सकती है। वैसे स्वस्थ शरीर के लिए गेहूं पौष्टिक होता है और सामान्य तौर पर इसका इस्तेमाल करना जरूरी है।  पर कुछ लोगों में गेहूं से बनी चीजें खाने से एक तरह की एलर्जी की समस्या भी हो जाती है। गेहूं धीरे-धीरे आपके शरीर पर असर डालता है, इसलिए इसकी वजह से पेट में होने वाली बीमारी का पता आसानी से नहीं लग पाता है।

बीमारी की वजह

दरअसल गेहूं में लसलसापन (ग्लूटन) होता है, जो गेहूं में पाया जानेवाला एक प्रकार का प्रोटीन है। जब इंसान के पेट में यह प्रोटीन आसानी से नहीं पच पाता है, तब यह पेट में जमना शुरू हो जाता है और बाद में पेट संबंधी बीमारियों की वजह बन जाता है। यह प्रोटीन या लसलसा पदार्थ इतना जहरीला हो जाता है कि छोटी आंत को प्रभावित करने लगता है। इस दौरान लसलसा पदार्थ पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता और समस्या बढ़ती चली जाती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट ईशी खोसला का मानना है कि अगर आप पेट की समस्या से परेशान हैं और साधारण इलाज से समस्या खत्म नहीं हो रही है तो निश्चित रूप से आपको गेहूं से एलर्जी टेस्ट करानी चाहिए। यह भी संभव है कि आप लीवर कैंसर के शिकार हो जाएं। इलाज करते समय डॉक्टर को भी इस समस्या के बारे में पता होना जरूरी है, क्योंकि आम तौर पर डॉक्टर गेहूं से एलर्जी पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। ईशी बताती हैं कि आम तौर पर 50 साल की उम्र में लोग इस समस्या का सामना करते हैं। वैसे गेहूं से एलर्जी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। अगर आपको पेट से संबंधित समस्या है तो बाजार में बिक रहे केक, पेस्ट्री, बर्गर जैसी चीजों को बिल्कुल न खाएं। हमें इस बारे में स्कूल स्तर से ही जागरूकता अभियान चलाना होगा।

लक्षण

अधिक थकान महसूस करना, भूख न लगना, जल्दी थक जाना, चिड़चिड़ापन आ जाना, एनीमिया की शिकायत लगातार रहना, एसिडिटी आदि।                                       

क्या उपाय करें

यह जरूरी है कि इसकी पहचान आरंभिक स्टेज में ही कर ली जाए। न्यूट्रिशनिस्ट ईशी खोसला सुझाव देती हैं, ‘साधारण खून जांच और बायोप्सी से आप इसका पता लगा सकते हैं।’ मैक्स हेल्थकेयर के डॉक्टर पंकज वोहरा के अनुसार, ‘एक बार ग्लूटन  (लसलसा पदार्थ) एलर्जी का पता लगने के बाद आप डॉक्टर या न्यूट्रीशियन द्वारा बताए गई खानपान से संबंधित सावधानियों का ध्यान रखें।’

इन पर भी गौर करें

बीमारी को बढ़ने न दें, क्योंकि यह जीवन भर की समस्या बन सकती है, इसलिए खानपान से संबंधित उचित सलाह आवश्यक है।

ग्लूटन से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसके प्रयोग वाले उत्पादों को, जैसे टूथपेस्ट, लिपस्टिक, सोया सॉस, बीयर और अन्य उत्पादों से बचें। तो अब अगली बार जब भी आप कोई नया उत्पाद ट्राई करें, चाहे वह कोई कॉस्मेटिक ही क्यों न हो, तो उसमें गेंहू की मात्र को जांच लें।

उन स्टोर्स की पहचान करें, जहां ग्लूटन मुक्त उत्पाद मिलते हैं। कई सारे ऐसे ब्रांड और स्टोर्स हैं, जो इस तरह के उत्पाद बेचते हैं। हालांकि इन्हें खरीदने व इनका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से उचित सलाह अवश्य ले लें।

यह कई बार जेनेटिक भी होता है, इसलिए यदि परिवार का एक सदस्य इससे पीड़ित है तो अन्य सदस्य अपनी जांच अवश्य करवा लें।

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