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भोपाल गैस कांड: CBI की याचिका खारिज

भोपाल गैस कांड: CBI की याचिका खारिज

सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल गैस त्रासदी मामले में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष केशब महिंद्रा और छह अन्य के खिलाफ आरोप कमजोर करने से सम्बद्ध अपने 1996 के निर्णय को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

जांच एजेंसी ने सर्वोच्च न्यायालय से महिंद्रा और अन्य आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या का आरोप तय करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। इस आरोप के तहत जुर्म साबित होने पर अधिकतम 10 वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 सितम्बर 1996 को अपने निर्णय में आरोपियों पर आरोप कमजोर कर दिए थे। इन सभी आरोपियों को पिछले साल भोपाल की एक अदालत ने लापरवाही का दोषी ठहराया था। इस जुर्म में अधिकतम दो वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है।

संविधान पीठ के फैसले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. एच. कपाड़िया ने कहा कि 1996 के फैसले के बाद आरोपियों पर बिना किसी आधार के कठोर प्रावधानों के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

न्यायालय ने कहा कि 1996 का निर्णय निचली अदालत द्वारा सख्त प्रावधानों के तहत आरोप तय किए जाने में बाधक नहीं था।

वर्ष 1984 में दो-तीन दिसम्बर की रात को यूनियन कार्बाइड के संयंत्र में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव होने से 3,000 लोगों की तत्काल और 25,000 से ज्यादा लोगों की बाद के वर्षों में मौत हो गई थी। इस गैस से करीब एक लाख लोग प्रभावित हुए और अनुमान के मुताबिक करीब पांच लाख लोगों पर अभी तक इस गैस का असर है।

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