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पढ़ाई में मन नहीं लगता

मेरा मन नहीं लगता। मैं एक काम कर रहा हूं। मैं ऑफिस भी जाता हूं, परन्तु ऐसा लगता है कि मैं इतनी भागमभाग क्यों कर रहा हूं। मैं खाली भी नहीं बैठना चाहता। कुछ न कुछ घर आकर भी करता रहता हूं, लेकिन मन उचाट है। मुझे क्या चाहिए, पता नहीं। मुझे पत्नी के साथ भी खुशी नहीं मिलती।       
-कबीर, नोएडा

ऐसी कोई तो बात है, जिसका सामना आप नहीं करना चाहते। सबसे पहले आप अपना मेडिकल चेकअप करवाएं। तब आप किसी मनोवैज्ञानिक से अवश्य मिलें ताकि डिप्रेशन का कारण मालूम हो। आपको हर रोज योग, एक्सरसाइज और प्राणायाम करना चाहिए।

मेरा पढ़ाई में मन नहीं लगता। मुझे मेरे माता-पिता की कोई बात समझ में नहीं आती। मेरे सारे दोस्त रात को बाहर जाते हैं। एक, दो या ढाई बजे तक रात को घर लौटते हैं। फिर मेरे ही माता-पिता क्यों चिल्लाते हैं। मैं अब 12वीं कक्षा में हूं। कभी-कभी सिगरेट पीने से कैंसर थोड़े ही हो जाता है। मैं घर छोड़कर कहीं पेइंग गेस्ट बनके रहना चाहता हूं। आप ही बताएं क्या करूं?
-हर्ष, अलीगढ़

आपको समझ है कि आप जो कर रहे हैं, वह गलत है। आप जानते हैं कि आपको पढ़ाई में ध्यान देना चाहिए। इससे आपका भविष्य एक लंबी डोर पकड़ सकता है, लेकिन आप एक छोटा-सा बच्चा बन के रह रहे हैं। जानते हैं, जो छोटे बच्चे होते हैं, उनको सब कुछ अभी चाहिए होता है। वे इंतजार करना नहीं जानते। लेकिन जैसे-जैसे किशोरावस्था से निकलकर व्यक्ति अर्ली यूथ अवस्था में आता है, उसे सारी बातें समझ में आती हैं। उन्हें समझ में आता है कि दूर की प्लानिंग यानी जीवन में योजना बनाकर कैसे भविष्य में सुख प्राप्त करना है। यह सोच-समझ अभी आप अपने अंदर लाना नहीं चाहते। आपकी स्कूल की फीस जाती है। आपके ट्यूटर्स की फीस जाती है, जिसकी कोई विशेष जरूरत नहीं होती। आप चाहते हैं कि आप एक सामाजिक प्राणी की तरह न रहें। कोई आपको कुछ न कहे। जरा अपना फर्ज भी याद रखें, सब ठीक हो सकता है।

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