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घाट किनारे बने आश्रमों पर नजरें हुईं टेढ़ी

गंगा के उस पार रेता पर बने आश्रमों पर वन विभाग की नजरें टेढ़ी हो गई हैं। काशी वन्य जीव प्रभाग ने इन आश्रमों और मठों पर कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग के अनुसार ये मठ और आश्रम कछुआ सेक्चुअरी क्षेत्र में चल रहे हैं।

प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा है कि आश्रम चलाने वाले खुद नहीं हटते तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग के अनुसार डोमरी में अराजी संख्या 310 में रेता दर्ज है। इसका क्षेत्रफल 98 हेक्टेयर है।

इस जमीन का पहले पट्टा किया गया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। सर्वे में पाया गया है कि कछुआ सेक्चुअरी में छोटे-बड़े करीब 11 आश्रम और मठ हैं। आश्रमों के मालिकों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदी है, लेकिन सरकारी रिकार्ड में रेता दर्ज है। इन आश्रमों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कटेसर में 12 हेक्टेयर का क्षेत्र कछुआ वन्य जीव विहार में निहित है।वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 की धारा 26 के तहत राज्यपाल ने 21 मई 09 को रामनगर किला से मालवीय रेल-सड़क पुल के बीच मातेश्वरी गंगा के क्षेत्र को कछुआ वन्य जीव विहार घोषित किया है।

इसके पूर्वी तट पर डोमरी, कटेसर, कोदोपुर, रामनगर की सीमा लगती है। कटेसर को छोड़कर सभी गांव बनारस के हैं। डोमरी और कटेसर में कछुआ सेंचुरी का सर्वे करके पत्थर गाड़ा जा चुका है। साथ ही ग्राउंड पोजिशनिंग लेबल (जीपीएस) से मैपिंग भी कराई गई है, ताकि पत्थरों को उखाड़ने के बावजूद सेंचुरी के डिमार्केशन को मिटाया नहीं जा सकेगा।

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