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गृह सचिव बन करता था ठगी

राज्यमंत्री का दर्जा और लाल बत्ती दिलाकर लाखों की ठगी करने के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। एसटीएफ को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि जालसाज संस्थाओं के कार्यालय का उद्घाटन करने गृह सचिव बन गाजियाबाद व मेरठ जाते थे।

उन्हें बकायदा पुलिस स्कोर्ट मुहैया कराया जाता था। लाखों वसूल कर राज्यमंत्री का दर्जा दिलाने और लालबत्ती व पुलिस गनर का जलवा हासिल करने की खबर ‘हिन्दुस्तान’ में मंगलवार को छपने के बाद शासन और डीजीपी मुख्यालय ने एसटीएफ से अब तक की जांच प्रगति के बारे में पूछा है।

एसटीएफ की जांच एएसपी मनोज कुमार झा के सुपुर्द की गई है। जांच में एक और हैरतअंगेज खुलासा हुआ है। पता चला है कि रैकेटबाज सचिवालय का एक बहुचर्चित कर्मचारी है। उसे ही जालसाज गाजियाबाद और मेरठ के दौरे पर बुलाते थे।

उसे गृह सचिव की तरह पेश कर गनर और लालबत्ती गाड़ी के बारे में ‘शिकार’ से बात कराई जाती थी। रैकेटबाजों ने मुजफ्फरनगर की एक सहकारी समिति के पैड पर तीन लोगों को उपाध्यक्ष बना उन्हें लालबत्ती सौंपी।

इनमें से एक व्यक्ति मुजफ्फरनगर का और दो गाजियाबाद के रहने वाले हैं। इसी तरह गाजियाबाद स्थित एक सहकारी समिति के बैनर तले मेरठ के एक व्यक्ति को भी उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। एसटीएफ के अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर राज्य सरकार से लालबत्ती किन नियमों के तहत दी जाती है और कौन आदेश करता है। एसटीएफ अब शिकायतकर्ता से रकम ऐंठने वाली संस्था के पदाधिकारियों की पड़ताल कर रही हैं।

शिकायत में चार ऐसे लोगों के नाम हैं, जो संस्था के अध्यक्ष, सचिव व उपाध्यक्ष हैं। कोटराज्यमंत्री का दर्जा देने के नाम पर ठगी की शिकायतें मिली थीं। एसटीएफ गोपनीय जांच कर रही है। अभी कुछ बताना ठीक नहीं होगा। कार्रवाई होने पर पूरा किस्सा उजागर किया जाएगा। पुलिस दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। बृजलाल, एसटीएफ के स्पेशल डीजी

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