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अयोध्या विवाद का निपटारा अदालत के बाहर होने पर सम्बंधित पक्षों के तर्क जुदा-जुदा हैं। कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं। विवाद से जुड़े प्रमुख पक्षकार रामलला विराजमान के वकील मदनमोहन पाण्डेय का कहना है कि मुसलमानों को उदारता का परिचय देते हुए मस्जिद के किसी और विकल्प का प्रस्ताव देना चाहिए। 

 जिससे साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मजबूत हो सके। हिन्दुओं के दूसरे पक्षकार हिन्दू महासभा के वकील हरिशंकर जैन को फिलहाल अदालत के बाहर किसी समझौते की सूरत नजर नहीं आती। उनके अनुसार चूंकि विवादित जमीन का बंटवारा नहीं हो सकता और हिन्दू या मुस्लिम पक्ष अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं तो फिर समझौता कैसे हो सकता है?

मुस्लिम पक्ष की ओर से विवाद के एक प्रमुख पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी कहते हैं कि बोर्ड के पास फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव अब तक नहीं आया, अगर आएगा तो ज़रूर गौर करेंगे। हाईकोर्ट लखनऊ में इस मुकदमे की पैरवी करने वाले जफरयाब जीलानी एडवोकेट कहते हैं कि मुसलमानों पर दबाव बनाकर तो कोई बात नहीं हो सकती।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने लखनऊ इजलास में साफ कह चुका है कि अगर कोई ऐसा प्रस्ताव जो देश के संविधान, शरीयत और मुसलमानों के स्वाभिमान के मुताबिक आता है तो उस पर ज़रूर गौर हो सकता है।

शिया धर्मगुरु और इमाम-ए-जुमा मौलाना कल्बे जव्वाद कहते हैं कि उन्होंने भी शंकराचार्य के बुलावे पर उनसे बात की थी मगर ऐसा लगा कि सब यही चाहते हैं कि मुसलमान अपना दावा छोड़ दें मगर यह नहीं हो सकता। लखनऊ के नायब इमाम ईदगाह और पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी के सदस्य मौलाना खालिद रशीद कहते हैं कि समझौते की बात हो भी तो हिन्दुओं के किस ग्रुप से? मुस्लिम पक्ष में तो पर्सनल लॉ बोर्ड नुमाइंदा संगठन है।

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  • Web Title:सुलह की सिर्फ बातें, झुकने को कोई नहीं तैयार