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राज्य में प्राइवेट सेक्टर में चल रहे नर्सिंग होम व पैथोलाजी सेंटर के साथ ही अन्य स्वास्थ्य से जुड़े केंद्रों पर सरकार की नकेल रहेगी।

इन संस्थानों को अब अनिवार्य रूप से स्टेट काउंसिल ऑफ क्लीनिकल एस्टिब्लिशमेंट काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए इन संस्थानों को न्यूनतम मानक व गुणवत्ता का पालना करना होगा।

केंद्र सरकार ने पिछले साल क्लीनिकल एस्टिब्लिसमेंट एक्ट लागू किया था। अभी तक हिमाचल, अरुणांचल समेत चार-पांच राज्यों ने ही इसे लागू किया। इस एक्ट में कई कड़े प्रावधान होने की वजह से प्राइवेट डांक्टर इसे लागू करने का विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने भी इसे लागू करने का संकल्प विधानसभा में पारित कर हाल ही में केंद्र को अपनी सहमति भेज दी है।

अब इसका जीओ जारी करने की तैयारी हो रही है। इसके लागू होने के बाद सभी निजी नर्सिग होम व पैथोलॉजी सेंटर को स्टेट क्लीनिकल एस्टिब्लिसमेंट काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

रजिस्ट्रेशन उसी का होगा, जो इन सेवाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक पूरे करेगा। इसके तहत प्रशिक्षित पैरामेडिकल व टेक्निकल स्टाफ के साथ ही क्वालिफाइड डाक्टरों की नियुक्ति जरूरी है।

राज्य के स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में यह काउंसिल गठित होगी। इसमें महानिदेशक स्वास्थ्य सदस्य सचिव होंगे। इसके अतिरिक्त इसमें मेडिकल के विभिन्न क्षेत्रों और सरकारी प्रतिनिधि सदस्य होंगे।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि भी इसका सदस्य होगा।

रजिस्ट्रेशन के समय ही काउंसिल की टीम नर्सिग होम और पैथोलाजी सेंटर का मुआयना कर उसमें मानकों का परीक्षण करेगी। यह भी देखेगी कि वहां आपातकालीन स्थिति में जो उपकरण प्रयोग में लाए जाते हैं उनकी गुणवत्ता ठीक है या नहीं। इस एक्ट के दायरे में मेडिकल शॉप भी आएंगी। उन्हें भी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

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  • Web Title:नर्सिग होम पर रहेगा पहरा