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भारत को शिकागो-मुकदमे के बाद मिल सकेगी राणा तक पहुंच

भारत को अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा पूरा हो जाने के बाद पाकिस्तानी मूल के कनाडियाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा तक संभवत: पहुंच मिल जाएगी जो मुंबई पर आतंकवादी हमलों के मामले में आरोपी है। 

लश्कर ए तैयबा से जुड़े डेविड हेडली के अहम साथी राणा से पूछताछ संबंधी भारत के आग्रह को अमेरिकी अधिकारियों को 26/11 हमले की साजिश में उसकी भागीदारी संबंधी सबूतों को इकटठा करने के बाद भेज दिया गया है। यह आग्रह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विधिक सहायता संधि के तहत भेजा गया है।
   
गृह सचिव गोपाल क़े पिल्लई ने बताया कि मुकदमा 16 मई को शुरू होगा और यह सबूतों पर आधारित है। हमें उम्मीद है कि मुकदमा जल्द ही अपने निष्कर्ष को पहुंच जाएगा। पिल्लई ने कहा कि हमें इस मामले में किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले राणा के मुकदमे के परिणामों का इंतजार करना होगा। भारत को उम्मीद है कि राणा का मुकदमा शिकागो की एक अदालत में दो सप्ताह में पूरा हो जाएगा।

मुंबई हमलों के सिलसिले में शिकागो में गिरफ्तार राणा को उसके इस दावे के बाद गिरफ्तार किया गया था कि उसने 26/11 के आतंकवादी हमलों के लिए पाकिस्तानी सरकार और आईएसआई की ओर से सहायता मुहैया करायी थी।
    
भारत राणा के पासपोर्ट और अन्य सबूतों की प्रतिलिपि की भी मांग करेगा जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने उससे जब्त किया है। सूत्रों ने कहा कि राणा तक पहुंच के बाद भारत अमेरिकी अधिकारियों को उसके प्रत्यर्पण के लिए कह सकता है क्योंकि हेडली के समान उसने सजा कम कराने के मकसद से अपराध कबूलने जैसा कोई समझौता नहीं किया है।
    
सूत्रों ने कहा कि राणा के बयान ने भारत के इस दावे की पुष्टि ही की है कि 2008 के इस आतंकवादी हमले में पाकिस्तान की आईएसआई एजेंसी लिप्त थी। राणा ने अपने बचाव में कहा था कि आतंकवादियों को साजो सामान की सहायता मुहैया कराने के कथित अवैध काम को उसने पाकिस्तानी सरकार और आईएसआई के कहने पर किया था, आतंकवादी संगठन लश्कर के इशारे पर नहीं।

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