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ईमानदार जांच की दरकार

पाकिस्तान के हुक्मरान मुल्क के इंटेलिजेंस व डिफेंस तंत्र की नाकामी को चाहे जिस भी रूप में कुबूल करें, वे कम से कम यह तो मानते ही हैं कि इस बात की जांच की दरकार है कि आखिर ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में पनाह पाने में कैसे कामयाब हुआ।

प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने सोमवार को पार्लियामेंट को बताया कि एक सीनियर फौजी अफसर से इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और उसे पार्लियामेंट को भी दिखाई जाएगी। हालांकि प्रधानमंत्री ने यह खुलासा नहीं किया कि उस तहकीकात के दायरे में अमेरिकी कार्रवाई के मामले में हमारी फौज की भूमिका भी आएगी या नहीं, फिर भी उनका यह ऐलान स्वागत करने लायक है। लेकिन जिस तरह से यूसुफ रजा गिलानी ने अपनी जिम्मेदारी कुबूलने से इनकार किया है, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे समय में, जब पाकिस्तान पर नाकाबिल या फिर साझीदार होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, तब उनका यह इनकार ‘हास्यास्पद’ ही है और उनका यह कहना भी कि ‘ये पूरी दुनिया की इंटेलिजेंस एजेंसियों की नाकामी’ है। दरअसल, यह अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश है।

प्रधानमंत्री के इन बयानों से पाक-अमेरिकी रिश्ते को कोई मदद नहीं मिलेगी, जो इस वक्त पिछले एक दशक के अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गया है। सदर ओबामा और उनके सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान से इस बात की जानकारी तफसील से मांगी है कि आखिर लादेन इतने दिनों तक एबटाबाद में छिपने में कैसे कामयाब रहा- लादेन की गिरफ्तार बीवियों में से एक के मुताबिक,वह पांच साल से वहां छिपा हुआ था।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसा एबटाबाद में लादेन के सपोर्ट नेटवर्क के बिना मुमकिन नहीं और पाकिस्तान को इसकी गहरी जांच करनी होगी। हालांकि ह्वाइट हाउस और अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के साथ पूरे रिश्ते के बारे में बेहद सावधान बयान दिए हैं। अब यह पाकिस्तान का फर्ज है कि वह ईमानदारी से उन हालात की जांच करे, जिनमें लादेन को एबटाबाद में आसानी से छिपने में मदद मिली और साथ ही इस बात की भी जांच हो कि हमारी फौज ने अपनी कार्रवाई में देरी क्यों की?                                 
डॉन, पाकिस्तान

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